पटना, 05 अक्टूबर। बिहार में 1,799 पदों वाली दारोगा भर्ती को लेकर विवाद एक बार फिर सड़क पर पहुंच गया है। मुख्य परीक्षा रद्द किए जाने के विरोध में सोमवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थी पटना की सड़कों पर उतर आए। गांधी मैदान से जेपी गोलंबर तक मार्च, बैरिकेडिंग और पुलिस के साथ धक्का-मुक्की के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। बैरिकेडिंग टूटने के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज और बल प्रयोग किया।
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि मेंस परीक्षा रद्द करने का फैसला वापस लिया जाए और शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) की तारीख घोषित की जाए। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा पास कर ली थी और अब उन्हें भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण का इंतजार था।
1,799 पदों की भर्ती में कहां से शुरू हुआ विवाद?
बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) की ओर से 1,799 पुलिस अवर निरीक्षक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। मुख्य परीक्षा 27 मई 2026 को आयोजित की गई थी और इसका परिणाम भी जारी किया गया था। इसके बाद अभ्यर्थी शारीरिक दक्षता परीक्षा की तैयारी में जुट गए थे।
हालांकि, आयोग ने 23 सितंबर को मुख्य परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक आयोग ने इसके लिए ‘अपरिहार्य कारणों’ का उल्लेख किया था और नई परीक्षा तिथि बाद में घोषित किए जाने की बात कही गई।
यही फैसला अब अभ्यर्थियों के विरोध की सबसे बड़ी वजह बन गया है।
मेंस पास करने के बाद PET की तैयारी कर रहे थे अभ्यर्थी
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि वे प्रारंभिक परीक्षा के बाद मुख्य परीक्षा में शामिल हुए और सफल अभ्यर्थियों का परिणाम जारी किया गया। रिपोर्टों के अनुसार करीब 10,789 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा में सफल हुए थे।
अभ्यर्थियों का कहना है कि मुख्य परीक्षा पास करने के बाद वे पिछले कई महीनों से शारीरिक दक्षता परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। दौड़, शारीरिक क्षमता और अन्य आवश्यक मानकों को पूरा करने के लिए उन्होंने लगातार अभ्यास किया।
अब मुख्य परीक्षा ही रद्द होने से उन्हें फिर से पूरी प्रक्रिया में लौटना पड़ सकता है। यही वजह है कि अभ्यर्थी इसे अपने लिए बड़ा झटका बता रहे हैं।
अभ्यर्थियों का सवाल- जब पास किया तो परीक्षा रद्द क्यों?
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का सबसे बड़ा सवाल है कि जब उन्होंने परीक्षा दी, परिणाम जारी हुआ और वे अगले चरण की तैयारी में जुट गए, तो पूरी मुख्य परीक्षा रद्द करने की जरूरत क्यों पड़ी?
उनका कहना है कि यदि परीक्षा के किसी स्तर पर अनियमितता हुई थी तो उसकी जांच की जानी चाहिए थी। जिन लोगों की भूमिका सामने आती, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती थी। लेकिन पूरी परीक्षा रद्द होने से उन अभ्यर्थियों पर भी असर पड़ा है जो अपने स्तर पर तैयारी करके सफल हुए थे।
एक प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी ने कहा कि उन्होंने प्रारंभिक और मुख्य दोनों परीक्षाएं पास की थीं और PET की तैयारी कर रहे थे, लेकिन परीक्षा अचानक रद्द कर दी गई। उनकी मांग है कि भर्ती प्रक्रिया तत्काल बहाल कर शारीरिक परीक्षा की तारीख घोषित की जाए।
शिकायतों और कथित अनियमितता के बाद रद्द हुई परीक्षा
मुख्य परीक्षा रद्द होने के पीछे अनियमितताओं की शिकायतों का मुद्दा भी सामने आया है। पिछले महीने पटना में एक अन्य समूह के अभ्यर्थियों ने परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद मुख्य परीक्षा रद्द किए जाने का फैसला सामने आया।

हालांकि, प्रदर्शन कर रहे सफल अभ्यर्थियों का आरोप है कि कुछ शिकायतों के आधार पर हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित किया जा रहा है। वे मांग कर रहे हैं कि यदि कोई अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई की जाए, लेकिन पूरी भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित नहीं किया जाए।
सात दिनों से गर्दनीबाग में धरना
अभ्यर्थियों का आंदोलन सोमवार को अचानक सड़क पर नहीं आया। वे पिछले सात दिनों से गर्दनीबाग में धरना दे रहे थे। मुख्य परीक्षा रद्द होने के बाद से उनकी मांग थी कि भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए और PET की तारीख घोषित की जाए।
सोमवार को इसी धरने के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने पटना में मार्च निकालने का फैसला किया। वे मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी मांग रखने की बात कह रहे थे।
गांधी मैदान से जेपी गोलंबर तक मार्च
सोमवार सुबह अभ्यर्थियों का गांधी मैदान के आसपास जुटना शुरू हुआ। इसके बाद करीब 11:30 बजे बड़ी संख्या में अभ्यर्थी गांधी मैदान से जेपी गोलंबर की ओर मार्च करने निकले। कई अभ्यर्थियों के हाथों में बैनर और तिरंगा था।
प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने और मुख्यमंत्री से मुलाकात करने की मांग कर रहे थे। पुलिस ने जेपी गोलंबर के पास बैरिकेडिंग कर मार्च को रोकने की कोशिश की।
बैरिकेडिंग टूटी तो पुलिस ने किया बल प्रयोग
जेपी गोलंबर के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच स्थिति तनावपूर्ण हो गई। अभ्यर्थियों ने आगे बढ़ने की कोशिश की और बैरिकेडिंग तोड़ दी। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज और बल प्रयोग किया। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल और महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।
प्रदर्शन के कारण इलाके में यातायात भी प्रभावित हुआ। प्रशासन ने जेपी गोलंबर और डाकबंगला चौराहे के बीच सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी और प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया।
उम्र सीमा और आर्थिक दबाव की भी चिंता
अभ्यर्थियों की परेशानी सिर्फ परीक्षा रद्द होने तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में देरी से उम्र सीमा पार होने का खतरा भी बढ़ रहा है। कुछ अभ्यर्थियों के लिए यह भर्ती सरकारी नौकरी हासिल करने का अंतिम अवसर हो सकती है।
कई अभ्यर्थियों ने लंबे समय तक तैयारी पर पैसा खर्च किया है। उनका कहना है कि मुख्य परीक्षा पास करने के बाद परिवारों को उम्मीद थी कि अब नौकरी की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच जाएगी। परीक्षा रद्द होने के बाद फिर से परीक्षा की अनिश्चितता ने आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ा दिया है।
‘गलती किसी की, सजा हमें क्यों?’
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी यह तर्क भी दे रहे हैं कि अगर परीक्षा के किसी एक केंद्र या स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो जांच उसी स्तर पर होनी चाहिए। उनका कहना है कि दोषी अभ्यर्थियों या संबंधित लोगों पर कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन सभी सफल अभ्यर्थियों को एक ही नजर से देखना उचित नहीं है।
अभ्यर्थी चुनाव का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि अगर किसी एक बूथ पर गड़बड़ी होती है तो पूरे राज्य का चुनाव रद्द नहीं किया जाता, बल्कि संबंधित क्षेत्र की जांच की जाती है। इसी तर्क के आधार पर वे पूछ रहे हैं कि अगर परीक्षा में कहीं गड़बड़ी हुई तो “गलती किसी और की होने पर उसकी सजा हमें क्यों दी जा रही है?”
प्रशासन ने प्रतिनिधिमंडल के जरिए बातचीत की अपील की
प्रदर्शन को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से अभ्यर्थियों से अपील की गई कि वे अपना प्रतिनिधिमंडल बनाकर सरकार के सामने अपनी मांग रखें। प्रशासन का कहना है कि सड़क पर प्रदर्शन करने से यातायात प्रभावित हो रहा है और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
दूसरी ओर, अभ्यर्थियों का कहना है कि वे पहले भी अपनी मांग अधिकारियों तक पहुंचा चुके हैं और अब वे मुख्यमंत्री से सीधे मुलाकात चाहते हैं।
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात है। वे चाहते हैं कि सरकार मुख्य परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले पर दोबारा विचार करे और भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता निकाले।
उनकी मांग है कि यदि परीक्षा में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही जिन अभ्यर्थियों ने मेहनत से परीक्षा पास की है, उनके हितों को भी ध्यान में रखा जाए।

अब आगे क्या होगा?
BPSSC ने मुख्य परीक्षा रद्द कर दी है और नई परीक्षा के संबंध में आगे की प्रक्रिया की घोषणा की जानी है। फिलहाल अभ्यर्थियों का आंदोलन इस मांग पर केंद्रित है कि रद्दीकरण वापस लिया जाए या मामले का ऐसा समाधान निकाला जाए जिससे सफल अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित न हो।
दूसरी ओर, अभ्यर्थियों के विरोध और पुलिस बल प्रयोग के बाद अब निगाहें सरकार और आयोग के अगले कदम पर हैं। 1,799 पदों की इस भर्ती से जुड़े हजारों अभ्यर्थियों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि भर्ती प्रक्रिया कब फिर पटरी पर लौटेगी और PET की तारीख कब घोषित होगी।






