पटना: बिहार जीविका से जुड़ी महिलाएं अब तकनीक के क्षेत्र में नया मुकाम हासिल करने जा रही हैं। सोलर प्लेट और एलईडी बल्ब बनाने के बाद अब राज्य की करीब 7 हजार ‘जीविका दीदियां’ इंडक्शन चूल्हा तैयार करेंगी। इस पहल का मकसद ग्रामीण इलाकों में गैस की समस्या को कम करना और महिलाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाना है।
IIT के इंजीनियर देंगे ट्रेनिंग
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी मुंबई और आईआईटी दिल्ली के इंजीनियर्स महिलाओं को ट्रेनिंग देंगे।
जीविका के सीईओ हिमांशु शर्मा के अनुसार, ऐसी महिलाओं का चयन किया जा रहा है जिनमें तकनीकी सीखने की रुचि और व्यवसायिक समझ हो। ट्रेनिंग के बाद ये महिलाएं कुशल तकनीशियन बनेंगी, जिससे उनकी आय में भी वृद्धि होगी।
2020 से शुरू हुआ ‘स्वच्छ ऊर्जा’ मिशन
‘स्वच्छ ऊर्जा-सशक्त महिला’ के विजन के तहत 6 जनवरी 2020 को गया में एक विशेष कंपनी का गठन किया गया था।
अब तक 7 हजार से अधिक महिलाएं इससे जुड़ चुकी हैं और पहले सोलर लैंप व प्लेट्स बनाकर पूरे राज्य में सप्लाई कर रही थीं। अब इंडक्शन चूल्हा निर्माण के जरिए आत्मनिर्भरता की नई दिशा मिलेगी।
गांव-गांव पहुंचेगी सस्ती और स्वच्छ तकनीक
ग्रामीण क्षेत्रों में रसोई गैस की कमी को देखते हुए यह पहल बेहद अहम मानी जा रही है।
- बाजार से सस्ते इंडक्शन चूल्हे
- स्थानीय स्तर पर मरम्मत और सर्विसिंग
- स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा
इन चूल्हों से गांवों की रसोई तक आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल तकनीक पहुंचेगी।
बाजार में बढ़ रही मांग
बिहार दिवस के दौरान गांधी मैदान पटना में लगे स्टॉल पर इन चूल्हों की अच्छी मांग देखी गई।
तीन दिनों में 10 चूल्हे बिके और कई की एडवांस बुकिंग भी हुई। इससे साफ है कि ग्रामीण और शहरी दोनों बाजारों में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है।
यह पहल न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि बिहार में स्वच्छ ऊर्जा और ग्रामीण उद्योग को भी नई दिशा देगी।




