कोलकाता, 06 अक्टूबर । पश्चिम बंगाल के दो चर्चित विधानसभा क्षेत्रों पूर्व मेदिनीपुर के नंदीग्राम और मुर्शिदाबाद के रेजीनगर में मंगलवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उपचुनाव संपन्न हुआ। चुनाव आयोग के प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक, दोनों सीटों पर मतदान प्रतिशत 78 फीसदी से अधिक रहा। नंदीग्राम में 79.39 फीसदी और रेजीनगर में 78.42 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।
हालांकि, सुरक्षा के व्यापक इंतजामों के बावजूद दोनों विधानसभा क्षेत्रों से राजनीतिक तनाव, पुलिस के साथ झड़प और मतदान में अनियमितता के आरोप सामने आए। रेजीनगर में सबसे बड़ी घटना हुई, जहां पुलिस के साथ तीखी बहस के बाद आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के प्रमुख और नाओदा से विधायक हुमायूं कबीर को गिरफ्तार कर लिया गया।
रेजीनगर में पुलिस से भिड़े विधायक हुमायूं कबीर
रेजीनगर में मतदान के दौरान उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब विधायक हुमायूं कबीर अपनी पार्टी के कार्यालय में पुलिस अधिकारियों से उलझ गए। कबीर ने पुलिस पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इशारे पर काम करने और मतदाताओं को डराने का आरोप लगाया।
आरोप है कि उन्होंने लोगों से पुलिस की कथित ज्यादती का डंडों से विरोध करने का आह्वान भी किया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी कबीर को शर्ट से पकड़कर वाहन में बैठाते दिखाई दे रहे हैं। मुर्शिदाबाद के पुलिस अधीक्षक सचिन मक्कड़ ने कहा कि कबीर चुनाव उम्मीदवार या अधिकृत चुनाव एजेंट नहीं थे। ऐसे में मतदान केंद्रों के आसपास उनकी मौजूदगी को नियमों का उल्लंघन माना गया। पुलिस ने उन पर मतदाताओं को प्रभावित करने और भड़काने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस उम्मीदवार ने थाने के बाहर दिया धरना
हुमायूं कबीर की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस उम्मीदवार मोहम्मद अब्दुल्लाहित काफी रेजीनगर थाने के बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए चुनाव रद्द कर दोबारा मतदान कराने की मांग की।
वहीं, वाम दलों ने भी मतदान प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया। सीपीआई (एम) ने दावा किया कि मोरादीघी क्षेत्र के दादपुर में बूथ संख्या 112, 113, 114 और 122 पर उसके चुनाव एजेंटों को रोका गया। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मतदाताओं की उंगलियों पर स्याही लगाने के बाद उन्हें वापस भेज दिया गया।

नंदीग्राम में भी तनाव, कांग्रेस ने लगाए आरोप
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की पूर्व विधानसभा सीट नंदीग्राम में भी मतदान के दौरान कई जगह तनाव की स्थिति बनी रही। कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान ने आरोप लगाया कि पुलिस की कथित शह पर उनके पोलिंग एजेंटों को मतदान केंद्रों में प्रवेश करने से रोका गया।
प्रधान ने दावा किया कि चक्रबेड़िया इलाके में पुलिस ने मतदाताओं पर लाठीचार्ज किया। नंदीग्राम के कई हिस्सों में कांग्रेस और भाजपा समर्थकों के बीच नोकझोंक की भी खबर सामने आई।
सीपीआई एजेंट पर हमले का आरोप
नंदीग्राम के सरबेड़िया इलाके में सीपीआई के एक पोलिंग एजेंट पर कथित हमले की घटना सामने आई। घायल एजेंट को बाद में अस्पताल में भर्ती कराया गया।
कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से शिकायत कर आरोप लगाया कि खेजुरी की ओर से मोटरसाइकिल सवार बाहरी लोग नंदीग्राम में प्रवेश कर मतदाताओं को धमका रहे हैं। वहीं मतदान में बाधा डालने के आरोप में पुलिस ने नंदीग्राम-1 ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष को भी हिरासत में लिया।
क्यों खाली हुई थीं दोनों सीटें?
नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटें क्रमशः शुभेंदु अधिकारी और हुमायूं कबीर के इस्तीफे के कारण खाली हुई थीं।
शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा चुनाव में भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी। नियमों के तहत उन्होंने बाद में नंदीग्राम सीट छोड़ दी।
इसी तरह हुमायूं कबीर ने रेजीनगर और नाओदा दोनों सीटों से चुनाव जीता था। बाद में उन्होंने नाओदा सीट अपने पास रखते हुए रेजीनगर से इस्तीफा दे दिया था।
नंदीग्राम में मुकाबला हुआ दिलचस्प
नंदीग्राम में भाजपा ने मुख्यमंत्री के दिवंगत सहयोगी चंद्रनाथ रथ की मां हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। इससे मुकाबले को भावनात्मक रंग भी मिला है।
तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे के नाम वापस लेने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन दिया है। इससे नंदीग्राम में मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
रेजीनगर में बहुकोणीय मुकाबला
रेजीनगर विधानसभा सीट पर मुकाबला बहुकोणीय है। यहां हुमायूं कबीर के बेटे गोलाम नबी आजाद, भाजपा के सखारव सरकार, टीएमसी के रबीउल आलम चौधरी और कांग्रेस के मोहम्मद अब्दुल्ला समेत कई उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।
71 कंपनियां केंद्रीय बलों की तैनात
दोनों विधानसभा क्षेत्रों में शांतिपूर्ण मतदान के लिए चुनाव आयोग ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। केंद्रीय बलों की 71 कंपनियां तैनात की गई थीं।
मतदान के दौरान सामने आई शिकायतों और घटनाओं पर संबंधित प्रशासन एवं चुनाव अधिकारियों की ओर से कार्रवाई की जा रही है। अब सभी की नजरें 9 अक्टूबर को होने वाली मतगणना और चुनाव परिणाम पर हैं।






