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प्रधानमंत्री मोदी ने ‘संस्कृत सुभाषित’ के जरिए दिया संदेश, कहा- शिक्षा जीवन को श्रेष्ठ बनाने का सशक्त माध्यम

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नई दिल्ली। नरेन्द्र मोदी ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि जीवन को श्रेष्ठ बनाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि शिक्षा एक ऐसी अनमोल पूंजी है, जिसके बल पर देश की युवा शक्ति हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है और भारत का नाम रोशन कर रही है।

संस्कृत सुभाषित के जरिए दिया संदेश
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया—
“श्रियः प्रदुग्धे विपदो रुणद्धि यशांसि सूते मलिनं प्रमार्ष्टि।
संस्कारशौचेन परं पुनीते शुद्धा हि बुद्धिः किल कामधेनुः॥”

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‘संस्कारयुक्त बुद्धि ही असली संपदा’
इस सुभाषित का अर्थ बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि शुद्ध और संस्कारित बुद्धि मनुष्य के लिए कामधेनु के समान होती है। ऐसी बुद्धि समृद्धि बढ़ाती है, विपत्तियों को दूर करती है, यश दिलाती है और जीवन की मलिनता को मिटाती है।

युवा शक्ति से भारत का उज्ज्वल भविष्य
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि शिक्षा और संस्कार से युक्त बुद्धि ही व्यक्ति और समाज को उन्नति के मार्ग पर अग्रसर करती है। उन्होंने विश्वास जताया कि देश की युवा शक्ति शिक्षा के बल पर हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर भारत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएगी।

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