‘परीक्षा पे चर्चा’ में प्रधानमंत्री मोदी का छात्रों से संवाद, कहा- हर छात्र में असीम क्षमता, आत्मविश्वास से आगे बढ़ें

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि देश के विद्यार्थी अद्भुत प्रतिभा के धनी हैं और उनमें अपने सपनों को साकार करने की पूरी क्षमता मौजूद है। केंद्र सरकार कि पहल ‘परीक्षा पे चर्चा’ का उद्देश्य छात्रों को यह मार्गदर्शन देना है कि वे अपनी प्रतिभा और कौशल का किस प्रकार सार्थक उपयोग कर व्यक्तिगत विकास और सफलता हासिल कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर ‘परीक्षा पे चर्चा’ के अवसर पर संस्कृत में सुभाषित साझा कर विद्यार्थियों की असीम संभावनाओं और उनके भीतर निहित गुणों के बारे में बताया। उन्होंने सुभाषित में लिखा, विद्या वितर्को विज्ञानं स्मृतिस्तत्परता क्रिया। यस्यैते षड्गुणास्तस्य नासाध्यमतिवर्तते॥

इस सुभाषित का अर्थ है कि जिस व्यक्ति में ज्ञान, तर्क, विज्ञान, स्मरण शक्ति, तत्परता और कर्मशीलता जैसे छह गुण होते हैं, उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं होता और वह हर चुनौती पर विजय पा सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों में अपने सपनों को साकार करने की पूरी क्षमता है और ‘परीक्षा पे चर्चा’ इसी उद्देश्य से एक सशक्त मंच प्रदान करता है, ताकि छात्र अपनी प्रतिभा और कौशल का सकारात्मक एवं रचनात्मक उपयोग कर सकें।

परीक्षा पे चर्चा में ना सिर्फ पढ़ाई की तैयारी की बात हुई, बल्कि पीएम मोदी ने इस दौरान कल्चर, चाय आदि कई चीजों पर चर्चा की

हम क्या डाइट फॉलो करें?

इस पर पीएम मोदी ने कहा कि मेरा कोई डाइट का सिस्टम नहीं है। हमेशा डाइट अपने मन का करना चाहिए और इसे दवाई की तरह नहीं खाना चाहिए। खाना हमेशा मन भर कर खाना चाहिए। अपने शरीर को सबसे पहले प्राथमिकता देनी चाहिए।

आपकी लाइफ में टीचर का क्या रोल था?

इस पर पीएम मोदी ने कहा कि हमारे टीचर का काफी रोल था और हमे लाइब्रेरी जाने के लिए कहते थे। इसके अलावा हमारे टीचर हमें फिजिकल फिटनेस के लिए आग्रह करते थे और योग के लिए कहते थे। हर एक टीचर का कुछ ना कुछ योगदान होता है।

पीएम मोदी ने गुजरात में पालतरिया समाज को लेकर किए गए काम का जिक्र भी परीक्षा पे चर्चा में किया है। इसके अलावा पीएम मोदी ने बच्चों को सलाह दी कि बच्चों को तनाव से बचने के लिए अच्छी नींद लेना चाहिए।  साथ ही उन्होंने कहा कि सपना के अनूकुल मेहनत करनी चाहिए।

इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि पहले लीडर बनिए। पहले ये तय कीजिए कि मुझे ये करना है और वो करना शुरू कर दीजिए। जैसे आप सड़क से कोई कचरा हटा देंगे तो लोग आपको फॉलो करेंगे। लीडर का मतलब ये नहीं है कि चुनाव लड़ना है। लीडर का मतलब है कि आप कुछ लोगों को अपनी बात समझा सकें। ऐसे में आपको पहले उसके बारे में समझना होगा।

पढ़ाई और खेल का संतुलन कैसे रखें?

इस सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षा सबकुछ नहीं कर सकती है, लेकिन सिर्फ खेल से भी काम नहीं चलेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि जिंदगी में खेल होने से बचना है तो खेलना चाहिए।

क्या एआई से डरना चाहिए?

हर युग में टेक्नोलॉजी आती है तो ऐसी चर्चा होती है। हमें इससे डरना नहीं चाहिए। हमारी कोशिश रहनी चाहिए कि वो उसका गुलाम नहीं बनेंगे। उसे अपना मालिक नहीं बनने देंगे। मैं गुलाम नहीं बनूंगा, ये आपको पक्का करना होगा। साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि जॉब नेचर बदलता रहता है, ऐसे में टेक्नोलॉजी को समझना होगा। हमें डरने की जरुरत नहीं है।

इंस्पिरेशन और मोटिवेशन में क्या चुनें?

इस सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि इंस्पिरेशन के साथ अनुशासन भी जरूरी है।  अगर अनुशासन है ही नहीं तो कितना ही इंस्पिरेशन होगा तो एक्सप्रेशन क्या काम करेगा। मान लीजिए एक किसान है उसकी प्रेरणा मिल रही है, बगल वाला किसान बहुत कमाई कर रहा है, ऐसे में इंस्पिरेशन तो मिलती है कि उतनी कमाई करनी चाहिए। लेकिन, डिसिप्लिन नहीं होगा तो इंस्पिरेशन काम नहीं करेगा। फिर वह बोझ बन जाता है निराशा पैदा करता है।

स्टार्टअप शुरू करना है कैसे करुं?

एक स्टूडेंट के इस सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि आप छोटे-छोटे स्टार्टअप से काम शुरू कर सकते हैं। साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि अगर आप पढ़ाई और पेशन दोनों को फॉलो करना चाहते हैं तो आप सप्ताह में दिन में कुछ वक्त पेशन के लिए निकालना शुरू कीजिए। इससे आप आसानी दोनों कामों को संतुलित तरीके से कर सकेंगे।

इस बार परीक्षा पे चर्चा में पहली बार ऐसा फॉर्मेट अपनाया गया है, जिसमें प्रधानमंत्री ने चार राज्यों-तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, गुजरात और असम—के चार अलग-अलग स्थानों पर मौजूद छात्रों से बातचीत की। इससे देश के विभिन्न क्षेत्रों और पृष्ठभूमियों के छात्रों को एक ही मंच पर जोड़ने का अवसर मिला। मल्टी-लोकेशन फॉर्मेट का उद्देश्य है कि भारत के छात्रों के अलग-अलग शैक्षणिक माहौल और दबाव को बेहतर तरीके से समझा जा सके।

दूसरा एपिसोड परीक्षा पे चर्चा 2026 के पहले संवाद के बाद आ रहा है, जो 6 फरवरी को आयोजित हुआ था। एपिसोड 1 में प्रधानमंत्री मोदी ने तनाव कम करने, सकारात्मक सोच बनाए रखने और परीक्षा के दौरान आत्मविश्वास की अहमियत पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने छात्रों को रटने के बजाय अवधारणाओं को समझने पर ध्यान देने की सलाह दी, जबकि अभिभावकों से बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालने की अपील की।

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