रांची, 01 जुलाई — झारखंड उच्च न्यायालय ने खूंटी जिले के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व विधायक पौलूस सुरीन और नक्सली जेठा कच्छप को बरी कर दिया है। दोनों को निचली अदालत द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को खारिज कर दिया गया है।
हाई कोर्ट ने अपील स्वीकार कर सजा निरस्त की
न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने दोनों की ओर से दायर क्रिमिनल अपील को स्वीकार करते हुए निचली अदालत के फैसले को निरस्त कर दिया। अदालत ने साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद दोनों आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया।
2013 के दोहरे हत्याकांड से जुड़ा मामला
यह मामला वर्ष 2013 का है, जब खूंटी जिले के तोरपा थाना क्षेत्र में पुलिस मुखबिर होने के आरोप में भुषण कुमार सिंह और राम गोबिंद की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दोनों की हत्या उनके घर के सामने बने चबूतरे पर अंधाधुंध फायरिंग कर की गई थी।
निचली अदालत ने सुनाई थी उम्रकैद
इससे पहले रांची की अपर न्यायायुक्त दिनेश कुमार की अदालत ने इस मामले में पौलूस सुरीन और जेठा कच्छप को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही जेठा कच्छप पर 45 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था, जिसे न चुकाने पर एक वर्ष की अतिरिक्त सजा का प्रावधान था।
दोनों पक्षों की दलीलों के बाद आया फैसला
मामले में पूर्व विधायक पौलूस सुरीन की ओर से वरीय अधिवक्ता बी.एम. त्रिपाठी और अधिवक्ता नवीन कुमार जायसवाल ने पैरवी की, जबकि जेठा कच्छप की ओर से अधिवक्ता मनोज चौबे ने पक्ष रखा। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया।
जांच में कई आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट
पुलिस जांच के बाद इस मामले में पौलूस सुरीन, जेठा कच्छप, कृष्णा महतो, पीएफएलआई सुप्रीमो दिनेश गोप समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 12 गवाह पेश किए, जबकि बचाव पक्ष की ओर से एक गवाह प्रस्तुत किया गया।
अन्य आरोपितों पर कार्रवाई जारी रहेगी
हाई कोर्ट के इस फैसले से पौलूस सुरीन और जेठा कच्छप को राहत मिली है। हालांकि इस मामले में अन्य आरोपितों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया पूर्व निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत जारी रहेगी।






