पटना : राजधानी में एक प्रेम कहानी ने उस वक्त फिल्मी मोड़ ले लिया, जब बिहार राज्य महिला आयोग का दफ्तर ही शादी का मंडप बन गया। किराएदारी से शुरू हुई यह कहानी दोस्ती, फिर प्यार और आखिरकार शादी तक पहुंची, लेकिन इस पूरे सफर में परिवार का विरोध सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आया।
मामला उस समय सुर्खियों में आया जब प्रेमी जोड़ा अपनी समस्या लेकर महिला आयोग पहुंचा। दोनों पहले ही 2 जुलाई 2025 को कोर्ट मैरिज कर चुके थे, लेकिन लड़के का परिवार इस रिश्ते को स्वीकार करने को तैयार नहीं था। परिवार की नाराजगी इतनी बढ़ गई कि लड़के को घर और संपत्ति से बेदखल तक कर दिया गया।
करीब दो घंटे तक आयोग में हंगामा, बहस और समझाने-बुझाने का दौर चलता रहा। हालात को संभालने के लिए डायल 112 की टीम को भी मौके पर बुलाना पड़ा। आयोग की अध्यक्ष और सदस्यों ने दोनों पक्षों को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब कोई रास्ता नहीं निकला, तो अंत में वहीं बड़ा फैसला लिया गया।
सभी के सामने लड़के ने लड़की की मांग में सिंदूर भर दिया और इस रिश्ते को सामाजिक मान्यता दे दी। इस पूरे घटनाक्रम ने वहां मौजूद लोगों को हैरान कर दिया और माहौल कुछ देर के लिए पूरी तरह फिल्मी हो गया।
जानकारी के अनुसार, लड़की करीब ढाई साल पहले लड़के के घर किराएदार बनकर रहने आई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और यह रिश्ता प्यार में बदल गया। तमाम विरोध और दबाव के बावजूद दोनों ने साथ रहने का फैसला किया।
फिलहाल, दोनों ने अलग किराए के घर में नई जिंदगी शुरू करने का निर्णय लिया है। महिला आयोग भी इस मामले पर नजर बनाए हुए है। यह कहानी एक बार फिर दिखाती है कि जब इरादे मजबूत हों, तो प्यार हर मुश्किल को पार कर सकता है।





