चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (MDMK) ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन से अलग होने का औपचारिक फैसला कर लिया है। यह निर्णय पार्टी की महासभा में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव के जरिए लिया गया।
कैसे हुआ फैसला?
शुक्रवार को उच्चस्तरीय समिति की बैठक के बाद शनिवार को महासभा बुलाई गई, जिसमें पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से राय ली गई। लंबी चर्चा के बाद गठबंधन से अलग होने पर सहमति बनी।
MDMK ने क्या वजह बताई?
पार्टी के प्रस्ताव में कहा गया:
- 2017 से MDMK इस गठबंधन का हिस्सा थी
- द्रविड़ विचारधारा और सांप्रदायिकता के विरोध के लिए साथ आए थे
- 2026 विधानसभा चुनाव में पार्टी की पहचान कमजोर करने की कोशिश हुई
- चुनाव के बाद की राजनीतिक गतिविधियां जनादेश के अनुरूप नहीं रहीं
इन कारणों से गठबंधन में बने रहना उचित नहीं समझा गया।
वाइको का बड़ा बयान
पार्टी महासचिव वाइको ने साफ कहा कि आने वाले चुनावों में किसके साथ गठबंधन होगा, इस पर फैसला “समय आने पर” लिया जाएगा। फिलहाल DMK से अलग होने का निर्णय ही लागू रहेगा।
विधायकों की गैरमौजूदगी से बढ़ी चर्चा
बैठक में पार्टी के दो विधायक—राजेंद्रन (कडैयनल्लूर) और सेंथिल सेल्वन (सीरकाझी)—अनुपस्थित रहे। इससे सियासी अटकलें तेज हो गई हैं कि वे इस्तीफे के पक्ष में नहीं हैं, हालांकि कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
चुनावी प्रदर्शन और आगे की राह
हालिया विधानसभा चुनाव में MDMK ने DMK गठबंधन के तहत ‘उदय सूरियन’ चुनाव चिह्न पर चार सीटों पर चुनाव लड़ा था और दो सीटों पर जीत दर्ज की थी।
अब गठबंधन से अलग होने के बाद तमिलनाडु में नए राजनीतिक समीकरण बनने की संभावना बढ़ गई है।
क्यों अहम है यह फैसला?
MDMK का यह कदम न सिर्फ DMK गठबंधन के लिए झटका माना जा रहा है, बल्कि 2026 के बाद की राजनीति में नए गठबंधन और समीकरणों के संकेत भी दे रहा है।






