झारखंड ATS की संरचना में बड़ा बदलाव, अब सीआईडी के अधीन करेगी कार्य, डीजीपी ने जारी किया आदेश

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—आतंकवाद और संगठित अपराध पर नियंत्रण के लिए प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव

रांची, 17 जून। झारखंड में आतंकवाद और देश विरोधी गतिविधियों से निपटने के लिए गठित आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) अब अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) के अधीन कार्य करेगा। इस संबंध में झारखंड की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा ने आधिकारिक आदेश जारी कर नई व्यवस्था लागू कर दी है।

पूर्व के सभी निर्देश किए गए निरस्त

डीजीपी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि एटीएस के संचालन से संबंधित पूर्व में जारी सभी निर्देशों को निरस्त कर दिया गया है। अब एटीएस की प्रशासनिक, अनुसंधान, जांच और परिचालन संबंधी सभी गतिविधियां पूरी तरह सीआईडी के निर्देशन में संचालित होंगी।

2015 में हुआ था एटीएस का गठन

आदेश के अनुसार, झारखंड एटीएस का गठन वर्ष 2015 में आतंकवाद पर प्रभावी नियंत्रण और सुरक्षा तंत्र को मजबूत बनाने के उद्देश्य से किया गया था। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अधिसूचना के तहत इसे राज्य स्तरीय थाने का दर्जा भी प्राप्त है।

इसके अलावा अधिसूचना संख्या 102/2021 के माध्यम से एटीएस को संगठित अपराधों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार भी प्रदान किया गया था।

जांच और पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी सीआईडी को

नई व्यवस्था के तहत एटीएस से जुड़े सभी मामलों की जांच सीआईडी के अधीन होगी। अनुसंधानकर्ता और पर्यवेक्षक अधिकारियों की नियुक्ति, मामलों की प्रगति रिपोर्ट तथा जांच की निगरानी से जुड़े सभी कार्य सीआईडी प्रमुख के माध्यम से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किए जाएंगे।

आतंकियों के नेटवर्क और स्लीपर सेल पर रहेगा फोकस

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि एटीएस का प्रमुख दायित्व आतंकवादी नेटवर्क की पहचान करना, स्लीपर सेल का भंडाफोड़ करना, आतंकी गतिविधियों की रोकथाम करना तथा संभावित आतंकी घटनाओं से प्रभावी ढंग से निपटना होगा।

एटीएस के पुलिस अधीक्षक अपने कार्यों का संचालन पुलिस महानिरीक्षक (अभियान) के निर्देशन में करेंगे।

गोपनीयता और नियमों के पालन पर जोर

डीजीपी ने निर्देश दिया है कि एटीएस अपने सभी अभियानों और जांच प्रक्रियाओं में उच्च स्तर की गोपनीयता बनाए रखे। साथ ही सभी कार्रवाई और अनुसंधान निर्धारित कानूनी प्रावधानों एवं प्रक्रियाओं के अनुरूप ही किए जाएं।

आतंकवाद और संगठित अपराध पर नियंत्रण को मिलेगी मजबूती

राज्य पुलिस मुख्यालय के इस फैसले को झारखंड में आतंकवाद, संगठित अपराध और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर निगरानी एवं नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। नई व्यवस्था से जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और त्वरित कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।

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