रांची। झारखंड उच्च न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों के विरुद्ध पुलिस जांच एवं किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर लगी रोक को अगले आदेश तक बढ़ा दिया है। सोमवार को न्यायमूर्ति एस.के. द्विवेदी की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व में दी गई अंतरिम राहत को कायम रखा। इस मामले की अगली सुनवाई 17 फरवरी को निर्धारित की गई है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने पक्ष रखा, जबकि ईडी की ओर से भारत के सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू, अधिवक्ता एके दास और सौरभ कुमार ने दलीलें पेश कीं। अगली सुनवाई में मुख्य रूप से याचिका की मेंटेनेबिलिटी यानी यह याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं, इस बिंदु पर बहस होगी।
पिछली सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने ईडी कार्यालय की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया था। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि रांची स्थित ईडी कार्यालय की सुरक्षा के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआईएसएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) या किसी अन्य अर्धसैनिक बल की तैनाती सुनिश्चित की जाए। साथ ही ईडी कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया गया था, ताकि किसी प्रकार के साक्ष्य से छेड़छाड़ न हो सके।
उल्लेखनीय है कि यह मामला एयरपोर्ट थाना कांड संख्या 05/2026 से संबंधित है, जिसमें ईडी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। ईडी अधिकारियों ने अदालत से अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर एवं आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने अथवा मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी, जैसे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही ईडी ने शिकायतकर्ता संतोष कुमार के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की है।
ईडी के अनुसार, संतोष कुमार पर लगभग 23 करोड़ रुपये के सरकारी धन के गबन का आरोप है, जो कथित पेयजल घोटाले से जुड़ा हुआ है। इस मामले में ईडी की ओर से उनके खिलाफ ईसीआईआर भी दर्ज की गई है। ईडी का कहना है कि 12 जनवरी 2026 को संतोष कुमार स्वयं ईडी कार्यालय पूछताछ के लिए पहुंचे थे, जहां वे अचानक उत्तेजित हो गए और उन्होंने स्वयं ही पानी का जग उठाकर अपने सिर पर मार लिया, जिससे उन्हें मामूली चोट आई। बाद में उन्होंने ईडी अधिकारियों पर हमला करने का आरोप लगाते हुए एयरपोर्ट थाना में मामला दर्ज कराया।





