रांची। झारखंड में नगर निकाय चुनाव की घोषणा हो गई है। रांची में आयोजित प्रेस वार्ता में मंगलवार काे राज्य निर्वाचन आयुक्त अलका तिवारी ने बताया कि झारखंड के 48 नगर निकायों (9 नगर निगम, 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायत) में 23 फरवरी को चुनाव होंगे। वहीं मतगणना 27 फरवरी को होगी।
उन्हाेंने बताया कि 28 जनवरी से चुनाव की अधिसूचना जारी होगी। नॉमिनेशन करने की प्रक्रिया 29 जनवरी से 4 फरवरी तक रहेगी। नॉमिनेशन वापस लेने की आखिरी तारीख छह फरवरी हैं। वहीं सात फरवरी को निर्वाचन प्रतीक आवंटित किया जाएगा। वोटिंग सात से पांच बजे तक होगी। इसके अलावा मतगणना 27 फरवरी होगी।
राज्य निर्वाचन आयुक्त अलका तिवारी ने बताया कि नौ नगर निगम, 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायत के लिए ये चुनाव होंगे। नगर पालिका क्षेत्र में कुल 43 लाख 23 हजार 574 मतदाता है, जिनमें 22 लाख 7 हजार 203 पुरुष और 21 लाख 26 हजार 227 महिला हैं। इस चुनाव में नोटा का कोई प्रावधान नहीं होगा। इसके अलावा चुनाव में ऑब्जर्वर और एक्सपेंडिचर ऑब्जर्वर भी तैनात किए जाएंगे। साथ ही आज से सभी 48 नगर निकाय क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी।
बैलेट पेपर से और गैर दलीय आधार पर चुनाव
राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह चुनाव बैलेट पेपर के जरिए कराए जाएंगे। साथ ही चुनाव गैर दलीय आधार पर होंगे, यानी उम्मीदवार किसी राजनीतिक दल के चुनाव चिन्ह पर नहीं, बल्कि निर्दलीय रूप से मैदान में उतरेंगे।
झारखंड में आचार संहिता लागू
चुनाव की घोषणा के साथ ही सभी 48 नगर निकाय क्षेत्रों में आचार संहिता प्रभावी हो गई है। अब इन क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं की नई घोषणाओं, शिलान्यास और राजनीतिक कार्यक्रमों पर चुनावी नियम लागू होंगे। राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रशासनिक अधिकारियों को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अब सभी की नजर नामांकन प्रक्रिया पर टिकी है, जहां से चुनावी हलचल और तेज होने की उम्मीद है।
विधि व्यवस्था एवं सुरक्षा बलों की तैनाती
चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए 8 जनवरी के बाद ही आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं। विधि-व्यवस्था संधारण हेतु एवं मतदान केन्द्रों पर सुरक्षा बलों को पर्याप्त संख्या में तैनाती रहेगी। चुनाव गैर-दलीय आधार पर होंगे, लेकिन सभी प्रमुख दल (जेएमएम, भाजपा, कांग्रेस आदि) शहरी क्षेत्रों में दबदबा कायम करने की कोशिशों में जुटे हैं। राजनीतिक हलकों में इसे राज्य की शहरी राजनीति का ‘सेमीफाइनल’ माना जा रहा है।





