नई दिल्ली। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को विश्वसनीय डेटा, नैतिक शासन और सार्वजनिक जवाबदेही पर आधारित होना चाहिए।
फडणवीस ने यह बात भारत मंडपम में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन में “एआई मीट्स एग्रीकल्चर: बिल्डिंग फूड सिक्योरिटी एंड क्लाइमेट रेजिलिएंस” विषयक विशेष सत्र में कही। उन्होंने कहा, “एआई की सफलता इसके ‘जादू’ में नहीं, बल्कि इसकी नैतिकता में है।”
उन्होंने कहा कि भारत का एआई मिशन प्रौद्योगिकी का उपयोग करके पारदर्शिता, समावेशिता और व्यापक पहुंच सुनिश्चित करना है। कृषि इस एआई मिशन के केंद्र में होनी चाहिए क्योंकि आज करीब 5 करोड़ भारतीय प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर हैं। छोटे किसानों के लिए एआई अति-स्थानीय मौसम पूर्वानुमान, कीट नियंत्रण और सटीक सिंचाई के जरिए खेती की तस्वीर बदल सकता है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव देवेश चतुर्वेदी ने बताया कि केंद्र सरकार एक एकीकृत एआई-संचालित प्लेटफॉर्म विकसित कर रही है। उन्होंने ‘महाविस्तार’ जैसे प्लेटफॉर्म का जिक्र करते हुए कहा कि अब किसानों को सामान्य डेटा के बजाय उनकी ‘किसान आईडी’ के आधार पर उनके खेत और फसल के लिए विशिष्ट सलाह दी जाएगी, जो केवल एक बटन या आवाज के माध्यम से उपलब्ध होगी।
विश्व बैंक समूह के उपाध्यक्ष जोहान्स ज़ुट ने भारत की सराहना करते हुए कहा कि यदि भारत कृषि क्षेत्र में एआई का सफल प्रयोग करता है, तो यह पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बनेगा। उन्होंने इसे छोटे किसानों के लिए एक “परिवर्तनकारी क्षण” करार दिया।
एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने आगाह किया कि एआई के एल्गोरिदम इस तरह तैयार होने चाहिए कि महिला किसान और हाशिए पर पड़े समूह पीछे न छूट जाएं। कोई भी तकनीक अपने आप में अमीर या गरीब हितैषी नहीं होती, यह उसके उपयोग के तरीके पर निर्भर करता है।
इस सत्र में सामूहिक रूप से एक साझा अनिवार्यता पर ज़ोर दिया गया। इनमें सटीक खेती, जलवायु लचीलापन, ओपन इकोसिस्टम और व्यावहारिक समाधान शामिल हैं। शिखर सम्मेलन में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए जिम्मेदार और समावेशी एआई ही भारत में कृषि परिवर्तन का भविष्य तय करेगा।





