कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार को झटका देते हुए निर्वाचन आयोग ने नवान्न की अपील खारिज कर दी है और राज्य के 25 वरिष्ठ अधिकारियों को चुनाव संबंधी विशेष प्रशिक्षण में अनिवार्य रूप से शामिल होने का निर्देश दिया है। इस सूची में 15 आईएएस और 10 आईपीएस अधिकारी शामिल हैं। इनमें पश्चिम बंगाल के गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीना का नाम भी है।
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, इन अधिकारियों को निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार ब्रीफिंग बैठकों में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। केंद्रीय पर्यवेक्षकों के लिए यह बैठकें पांच और छह फरवरी को दिल्ली में आयोजित होंगी। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनावी जिम्मेदारियों से मुक्त किए जाने को लेकर राज्य सरकार की ओर से जो आवेदन किया गया था, उसे नामंजूर कर दिया गया है।
बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)
प्रक्रिया शुरू होने के बाद से ही राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में पश्चिम बंगाल के 25 वरिष्ठ अधिकारियों का चयन किया गया है।
राज्य सरकार का तर्क था कि चुनाव से पहले इन शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को बाहर भेजने से राज्य में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसी आधार पर राज्य की ओर से 25 में से 17 अधिकारियों को इस जिम्मेदारी से मुक्त करने की मांग की गई थी।
हालांकि, चुनाव आयोग ने राज्य सरकार की इस दलील को स्वीकार नहीं किया और सभी नामित अधिकारियों को चुनावी प्रशिक्षण व केंद्रीय पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी निभाने के निर्देश जारी कर दिए। इस फैसले के बाद राज्य और आयोग के बीच चल रहा टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।





