रांची: झारखंड की सियासत में कांग्रेस और झामुमो के रिश्तों को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, सार्वजनिक तौर पर दोनों दल संतुलित बयान दे रहे हैं, लेकिन अंदरखाने मतभेद के संकेत भी साफ दिख रहे हैं।
प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने कानून-व्यवस्था समेत कई मुद्दों पर जल्द ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की बात कही है। चूंकि मुख्यमंत्री अभी असम चुनाव में व्यस्त हैं, ऐसे में यह बैठक चुनाव के बाद होने की संभावना है।
असम चुनाव में गठबंधन नहीं, भविष्य पर नजर
असम में झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के बीच गठबंधन नहीं बनने के सवाल पर राजू ने साफ कहा कि अब इस पर बात करने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य की रणनीति दोनों दलों के प्रदर्शन के आधार पर तय होगी
‘सांप’ वाले बयान पर चुप्पी
झामुमो के एक नेता द्वारा कांग्रेस को “सांप” कहे जाने के विवाद पर के. राजू ने चुप्पी साध ली। उन्होंने इस पर प्रतिक्रिया देने से बचते हुए कहा कि पार्टी सभी मुद्दों पर सीधे मुख्यमंत्री से बात करेगी।
हालांकि, राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सफाई दी कि यह बयान भाजपा के संदर्भ में दिया गया था।
राज्यसभा चुनाव पर भी सस्पेंस
झारखंड की दो राज्यसभा सीटों को लेकर भी कांग्रेस ने फिलहाल कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है। महागठबंधन के पास संख्या बल पर्याप्त (करीब 56 वोट) माना जा रहा है, लेकिन रणनीति पर अभी चुप्पी बरकरार है।
कांग्रेस के अंदर भी असंतोष
नई सरकार बनने के बाद से ही कांग्रेस पर “दबाव में काम करने” के आरोप लगते रहे हैं। पार्टी के कुछ विधायकों ने आलाकमान से इसकी शिकायत भी की थी।
इसी बीच, योगेंद्र साव, निर्मला देवी और अम्बा प्रसाद जैसे नेताओं के सरकार विरोधी बयानों ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ाई हैं।
माइनिंग माफिया और प्रशासन पर हमला
के. राजू ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस माइनिंग माफिया और जिला प्रशासन के खिलाफ आंदोलन जारी रखेगी। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, खाली पड़े शिक्षकों के पद और कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
क्या है राजनीतिक संदेश?
पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि:
- कांग्रेस फिलहाल सरकार पर सीधे हमला करने से बच रही है
- निशाना प्रशासनिक स्तर (बीडीओ, पुलिस, डीसी-एसपी) पर रखा जा रहा है
- विवादित बयानों पर भी संयम बरता जा रहा है





