नई दिल्ली/बर्लिन, 22 अप्रैल: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भविष्य में ईरान और अमेरिका के बीच भारत मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत हमेशा शांति का पक्षधर रहा है और सही समय आने पर वह इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभा सकता है।
बर्लिन में भारतीय समुदाय से संवाद
तीन दिवसीय जर्मनी दौरे के पहले दिन बर्लिन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्तमान में भारत सीधे मध्यस्थता नहीं कर रहा, लेकिन भविष्य में इसकी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
पीएम मोदी ने भी की शांति की अपील
उन्होंने बताया कि नरेंद्र मोदी पहले ही दोनों देशों से युद्ध समाप्त करने की अपील कर चुके हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि हर कूटनीतिक पहल का एक सही समय होता है और भारत उसी के अनुरूप कदम उठाता है।
जर्मनी दौरे का उद्देश्य
रक्षा मंत्री जर्मनी के तीन दिवसीय दौरे पर हैं, जहां वे बोरिस पिस्टोरियस समेत वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करेंगे। इस दौरान रक्षा सहयोग, ‘मेक इन इंडिया’ के तहत संयुक्त उत्पादन और तकनीकी साझेदारी पर चर्चा होगी।
भारतीय प्रवासियों की सराहना
राजनाथ सिंह ने जर्मनी में रह रहे भारतीय समुदाय को दोनों देशों के बीच मजबूत सेतु बताते हुए उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि व्यापार, तकनीक, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में प्रवासी भारतीय अहम भूमिका निभा रहे हैं।
भारत-जर्मनी संबंधों के 75 वर्ष
उन्होंने बताया कि 2026 भारत और जर्मनी के बीच राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है, जो आपसी विश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित हैं।
आत्मनिर्भर भारत और वैश्विक भूमिका
रक्षा मंत्री ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का जिक्र करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य घरेलू उत्पादन बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आज भारत की बातों को गंभीरता से सुना जाता है।
शांति पर भारत का जोर
राजनाथ सिंह ने दोहराया कि भारत का कूटनीतिक रुख हमेशा संतुलित रहा है और वह चाहता है कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव खत्म हो तथा क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित हो।






