आरएसएस का उद्देश्य व्यक्ति निर्माण है, राजनीति नहीं: डॉ. मोहन भागवत

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देहरादून। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने कहा कि संघ किसी राजनीतिक दल का अंग नहीं है और न ही चुनावी राजनीति उसका उद्देश्य है। संघ व्यक्ति निर्माण का कार्य करता है, क्योंकि व्यवस्था तभी सुदृढ़ रहती है, जब व्यक्ति सुदृढ़ हो।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ भागवत दो दिन के प्रवास पर उत्तराखंड में हैं। आज प्रवास के दूसरे दिन डाॅ भागवत हिमालयन कल्चरल सेंटर के प्रेक्षागृह में पूर्व सैनिकों और पूर्व सेना अधिकारियों के साथ विशेष संवाद गोष्ठी काे संबाेधित कर रहे थे। डाॅ भागवत ने कहा कि संघ बिना साधनों के खड़ा हुआ और दो बार प्रतिबंध के बाद भी समाज के बल पर आगे बढ़ा। संघ का स्वयंसेवक आत्मिक शक्ति से प्रेरित होकर समाज परिवर्तन के लिए कार्य करता है। डॉ भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ का उद्देश्य प्रचार नहीं, बल्कि समाज का संगठन और राष्ट्र का उत्थान है। संघ नहीं, समाज के कारण देश बड़ा हुआ, यही इतिहास में दर्ज होना चाहिए। उन्होंने संघ की प्रारंभिक जानकारी देने के साथ ही स्थापना वर्ष 1925 से लेकर 2025 तक की यात्रा के प्रमुख बिंदुओं को पूर्व सैनिकों के समक्ष रखा।

उन्होंने कहा कि देश के भाग्य निर्माण में समाज की भूमिका सबसे बड़ी होती है। समाज मजबूत होगा तो राष्ट्र की रक्षा भी सशक्त होगी। समाज का बल ही सबको बलवान बनाता है, इसलिए समाज का नेतृत्व चरित्रवान और संगठित होना आवश्यक है। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध का उदाहरण देते हुए बताया कि इंग्लैड युद्ध के लिए तैयार नहीं था और जर्मनी पूरी ताकत के साथ युद्ध के मैदान में था, तब चर्चिल का मंत्रिमंडल ने भी समझौते की बात कही, लेकिन चर्चिल ने नागरिकों से बातचीत के बाद युद्ध का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि जनता ने चुना है और यदि जनता युद्ध चाहती है तो चर्चिल ने युद्ध का निर्णय लिया। डॉ भागवत ने वर्ष 1857 की क्रांति की विफलता का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि उस समय भारत में वीरता, शौर्य और सहास की कमी नहीं थी, फिर भी हार हुई। वीरों ने संघर्ष किया, भले ही वे पराजित हुए, लेकिन स्वतंत्रता की ज्योति बुझी नहीं। इसके बाद भी क्रांतिकारी आंदोलनों ने देश की आजादी के लिए निरंतर संघर्ष जारी रखा। आरएसएस के सर संघचालक ने कहा कि स्वतंत्रता तक सभी ने एकजुट होकर संघर्ष किया लेकिन स्वतंत्रता के बाद देश की राजनीति स्वार्थों की ओर मुड़ गई और कई राजनीतिक दलों का जन्म हुआ। अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई समाज सुधार के बिना संभव नहीं थी इसलिए जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर समाज को एकजुट करना आवश्यक था। उन्हाेंने कहा कि आज कई राजनीतिक धाराएं हैं और इससे विकृति भी उत्पन्न हुई है।

जन्मजात राष्ट्रभक्त थे हेडगेवार

उन्होंने संघ के प्रथम सर संघचालक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार के चिंतन व राष्ट्रभक्ति को लेकर कहा कि वे जन्मजात राष्ट्रभक्त थे और उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय व निर्भीक भूमिका निभाई। गुलामी के प्रति उनमें तीव्र रोष था। वंदेमातरम समेत अन्य आंदोलनों में सक्रिय रहे और जेल भी जाना पड़ा, लेकिन वे मातृभूमि के संघर्ष करते रहे। उन्होंने कहा कि आज आरएसएस व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण में जुटा हुआ है।

विभिन्नता में एकता का देश है भारत

डॉ भागवत ने कहा कि भाषा, पंथ, देवी-देवता और परंपराएं भिन्न हो सकती हैं, लेकिन हमें जोड़ने वाला एक सूत्र है, उसे मजबूत करना होगा। उन्होंने सेक्युलर शासन व्यवस्था को यूरोपीय अवधारणा बताते हुए कहा कि भारत का स्वभाव विविधता में एकता का है। सत्य को एक ही रूप में नहीं देखा जा सकता। हमारे ऋषियों और पूर्वजों ने विश्व कल्याण की भावना से इस राष्ट्र की आधारशिला रखी। डॉ भागवत ने कहा कि हिंदू शब्द इस देश की पहचान है। यह मानवता और विश्व कल्याण का भाव लिए हुए है।

पूर्व सैनिकों का किया आह्वान

उन्होंने पूर्व सैनिकों से आह्वान किया कि संघ के शिविरों और कार्यक्रमों में आकर स्वयंसेवकों के कार्य को देखें और रुचि अनुसार सेवा कार्यों से जुड़ें। संघ के देशभर में एक लाख तीस हजार से अधिक सेवा प्रकल्प चल रहे हैं। इन प्रकल्पों में रूचि के अनुसार पूर्व सैनिक जुड़ सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ का उद्देश्य प्रचार नहीं, बल्कि समाज का संगठन और राष्ट्र का उत्थान है। “संघ नहीं, समाज के कारण देश बड़ा हुआ यह इतिहास में दर्ज होना चाहिए।”

डॉ भागवत का अभिनंदन व स्वागत

कार्यक्रम के आरंभ में डॉ मोहन भागवत ने भारत माता के चित्र पर पुष्प किए और इसके साथ ही वंदे मातरम् गायन हुआ। इसके बाद जनरल गुलाब सिंह रावत, कर्नल कोठियाल व कर्नल मयंक चौबे ने सरसंघचालक डॉ भागवत को शाल ओढ़ाकर व पारंपरिक टोपी से सम्मानपूर्वक स्वागत व अभिनंदन किया।

कार्यक्रम में उपस्थिति

इस भावपूर्ण व प्रेरणादायी कार्यक्रम में थलसेना, नौसेना, आईटीबीपी, तटरक्षक बल व अन्य सैन्य क्षेत्रों से सेवानिवृत्त अनेक पूर्व सैनिक व अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गान के भावपूर्ण गायन के साथ हुआ।

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