अकीदत के साथ पूरे झारखंड में मनाई गई शब-ए-बरात, रोशनी और इबादत से जगमगाईं मस्जिदें

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रांची: रहमत, मग़फ़िरत और बरकतों की रात शब-ए-बारात मंगलवार को रांची जिले में पूरे अकीदत और एहतराम के साथ मनाई गई। जिले भर में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस मुकद्दस रात को इबादत और दुआओं के साथ गुजारा। मस्जिदों, इमामबाड़ों और घरों में नमाज़, कुरान ख्वानी, तस्बीह और दुआओं का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। लोगों ने अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी, परिवार की सलामती, समाज में भाईचारा और देश में अमन-चैन की दुआ मांगी। शब-ए-बरात को लेकर शहर की मस्जिदों में विशेष नमाज, कलाम पाक की तिलावत और नफिल नमाज का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए।

शब-ए-बारात कब मनाया जाता है?

गौरतलब है कि शब-ए-बारात इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार शाबान माह की 15वीं रात को मनाई जाती है। इसे ‘मग़फ़िरत की रात’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस रात अल्लाह तआला बंदों के आमाल का फैसला फरमाते हैं और सच्चे दिल से मांगी गई दुआएं कबूल होती हैं। कई इलाकों में सामूहिक इबादत और दुआ सभाओं का आयोजन किया गया, जिसमें बुजुर्गों के साथ-साथ युवा और बच्चे भी शामिल हुए। धार्मिक और सामाजिक लोगों ने इस मौके को आपसी सौहार्द और इंसानियत का संदेश फैलाने का जरिया बताया। शब-ए-बारात की यह पाक रात शांति, एकता और भाईचारे का पैग़ाम देकर संपन्न हुई।

झारखंड में शब-ए-बारात पर सार्वजनिक अवकाश

झारखंड सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मियों के लिए शब-ए-बारात के अवसर पर छुट्टी की घोषणा की है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग द्वारा मंगलवार को इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई। इस दौरान राज्य सरकार के सभी कार्यालय, शैक्षणिक संस्थान और सार्वजनिक उपक्रम आज बंद रहेंगे।

वही जमशेदपुर में ज़ाकिरनगर स्थित शिया जामा मस्जिद में 12वें इमाम हज़रत महदी अलैहिस्सलाम की विलादत के अवसर पर विशेष महफिल सजी, जहां धार्मिक तकरीरों के साथ दुआ और इबादत का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। शब-ए-बरात के मौके पर मुस्लिम समाज के लोग अपने मरहूम परिजनों की कब्रों पर पहुंचकर उनकी मगफिरत के लिए दुआ करते हैं। इसी परंपरा के तहत साकची, मानगो, जाकिरनगर, धातकीडीह, जुगसलाई, बारीनगर और बर्मामाइंस कैरेज कॉलोनी स्थित कब्रिस्तानों में देर रात तक लोगों का आना-जाना लगा रहा। कब्रिस्तानों में मोमबत्ती और अगरबत्ती जलाकर रोशनी की गई तथा फूलों की चादर चढ़ाई गई। कब्रिस्तान जाने वाले रास्तों पर विभिन्न समितियों की ओर से रोशनी की समुचित व्यवस्था की गई थी, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

जाकिरनगर कब्रिस्तान में वक्फ मुस्लिम कब्रिस्तान कमेटी की ओर से नमाज-ए-मगरिब के बाद सामूहिक दुआ का आयोजन किया गया। इससे पूर्व फातिहाख्वानी की गई। दुआ के दौरान समाज के लोगों ने अपने मरहूम परिजनों की मगफिरत के साथ-साथ उन मरहूमीन के लिए भी विशेष प्रार्थना की, जिनका इस दुनिया में कोई नहीं है। कार्यक्रम का उद्देश्य इंसानियत, भाईचारे और आपसी संवेदना की भावना को मजबूत करना बताया गया। वहीं बिष्टुपुर में शब-ए-बरात के अवसर पर शोहदा-ए-करबला कमेटी की ओर से कुरानख्वानी और फातेहा का आयोजन किया गया। इस मौके पर अनवर अली, अब्बास अंसारी सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने मरहूमीन की मगफिरत के लिए दुआ की।

शब-ए-बरात के दूसरे दिन बुधवार को मुस्लिम समाज के लोग रोजा रखेंगे। इमारत-ए-शरिया के प्रमुख काजी सऊद आलम कासमी ने बताया कि इस दिन रोजा रखने की समाज में पुरानी परंपरा है।उन्होंने कहा कि हजरत मोहम्मद स्वयं इस दिन रोजा रखा करते थे, इसलिए इसका विशेष महत्व है और इसे बड़े सवाब का कारण बताया गया है।

धनबाद में अकीदत और एहतराम के साथ शब-ए-बारात मनाई गई। मंगलवार को शब-ए-बरात की रात शहर के मुस्लिम क्षेत्रों में रौनक रही। मस्जिद, मदरसे और कब्रिस्तान पूरी रात रोशन और रौनक से भरी रही। फूल और लाइटों से अकर्षक ढंग से सजाए गए थे। मस्जिद और कब्रिस्तान दुआ और इबादत करनेवालों से गुलजार रहे। रांगाटांड़, वासेपुर, शमशेर नगर भूली, पांडरपाला बाइपास रोड स्थित कब्रिस्तान में लोगों का जुटान हुआ। लोगों ने कब्रिस्तान जाकर पूर्वजों के जाने-अनजाने में अपने किए गए सभी गुनाहों के लिए मांफी मांगी और जन्नत में जगह देने की दुआ की। उनके नाम से फातिहा भी पढ़े गए।

वासेपुर, पांडरपाला, टिकियापाड़ा, पुराना बाजार, आजाद नगर भूली, शमशेर नगर की मस्जिदों में लोग जुटे यहां रात भर इबादत हुई। नमाज-ए-फज्र के बाद सामूहिक दुआ की गई। कई मोहल्लों में आतिशबाजी भी हुई। शब-ए-बारात में पूरी रात दुआओं का दौर चलता रहा। इसलिए इसे इबादत, फजीलत, रहमत और मगफिरत की रात कहा जाता है। इस्लामिक धार्मिक मान्यता के अनुसार शब-ए-बारात की रात की गई हरेक जायज दुआओं को अल्लाह कबूल करते हैं और अपने बंदों के गुनाहों को माफ करते हैं। जामा मस्जिद के इमाम मो निजामुद्दीन बताते हैं कि शब-ए-बारात दो शब्दों से मिलकर बनी है, जिसमें सब का मतलब होता है रात और बारात का मतलब बरी होना।

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