रांची। हूल दिवस के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को झारखंड के ऐतिहासिक हूल क्रांति स्थल भोगनाडीह, राजधानी रांची के मोराबादी स्थित सिदो-कान्हू पार्क, प्रदेश कार्यालय सहित राज्य के सभी 595 मंडलों में कार्यक्रम आयोजित कर हूल क्रांति के अमर शहीद सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और वीरांगनाओं फूलो-झानो को श्रद्धांजलि अर्पित की। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनकी प्रतिमाओं एवं चित्रों पर माल्यार्पण कर उनके बलिदान को नमन किया।
रांची में भाजपा नेताओं ने किया श्रद्धांजलि अर्पित
रांची के मोराबादी स्थित सिदो-कान्हू पार्क में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने महानायकों की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। प्रदेश कार्यालय में भी आयोजित कार्यक्रम में नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हूल क्रांति के नायकों को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
इसके अलावा भोगनाडीह सहित राज्य के सभी मंडलों में भाजपा कार्यकर्ताओं ने विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से हूल क्रांति के शहीदों को याद किया।
‘हूल क्रांति जनजातीय स्वाभिमान का प्रतीक’ : आदित्य साहू
प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि हूल दिवस जनजातीय समाज के संघर्ष, स्वाभिमान और बलिदान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि 30 जून 1855 को भोगनाडीह की धरती से सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो के नेतृत्व में हजारों संथालों ने ब्रिटिश शासन, शोषण और अन्याय के खिलाफ हूल क्रांति का शंखनाद किया था।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल अंग्रेजी शासन के विरुद्ध विद्रोह नहीं था, बल्कि जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा का व्यापक जनआंदोलन था, जिसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी।
राज्य सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने स्वतंत्रता आंदोलन के उपेक्षित जनजातीय नायकों को सम्मान दिलाने का काम किया, जबकि विपक्षी दलों ने उनके योगदान की अनदेखी की।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान राज्य सरकार पारंपरिक जनजातीय व्यवस्थाओं—प्रधान, मानकी और मुंडा प्रणाली—को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।
भोगनाडीह की प्रशासनिक व्यवस्था पर उठाए सवाल
भोगनाडीह में हूल दिवस के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर आदित्य साहू ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि आदिवासियों को अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने के लिए भी प्रशासनिक अनुमति और बॉन्ड भरना पड़े, तो यह सरकार की तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भोगनाडीह को पुलिस छावनी में तब्दील कर 50 से अधिक मजिस्ट्रेटों की तैनाती की गई, जिससे आदिवासी समाज को भयभीत करने का प्रयास किया गया।
बाबूलाल मरांडी बोले- हूल आंदोलन आज भी देता है प्रेरणा
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि वर्ष 1855 में संथाल परगना की धरती से शुरू हुआ हूल आंदोलन ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ ऐतिहासिक जनविद्रोह था।
उन्होंने कहा कि सिदो मुर्मू, कान्हू मुर्मू, चांद मुर्मू, भैरव मुर्मू तथा वीरांगनाओं फूलो मुर्मू और झानो मुर्मू के नेतृत्व में संथाल समाज ने जल, जंगल, जमीन और अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए अभूतपूर्व संघर्ष किया। यह आंदोलन आज भी अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणा देता है।
भूमि और आदिवासी अधिकारों को लेकर सरकार पर हमला
मरांडी ने आरोप लगाया कि हूल आंदोलन के बाद जिस स्थानीय प्रधान व्यवस्था को भूमि बंदोबस्ती की जिम्मेदारी मिली थी, उसे वर्तमान सरकार कमजोर कर रही है। उन्होंने दावा किया कि आदिवासी भूमि पर अवैध कब्जे बढ़ रहे हैं, घुसपैठियों को संरक्षण दिया जा रहा है और रिम्स-2 परियोजना के नाम पर आदिवासियों की उपजाऊ जमीन अधिग्रहित करने का प्रयास किया जा रहा है।
पाकुड़ में भी आयोजित हुआ श्रद्धांजलि कार्यक्रम
पाकुड़ में भाजपा के संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने हूल क्रांति के नायकों की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि सिदो-कान्हू का बलिदान भारतीय इतिहास का गौरवपूर्ण अध्याय है और हूल दिवस राष्ट्र एवं समाज के लिए समर्पण और संघर्ष की प्रेरणा देता है।
ये नेता रहे मौजूद
रांची के सिदो-कान्हू पार्क में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, विधानसभा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल, पूर्व विधायक रामकुमार पाहन, महानगर अध्यक्ष वरुण साहू सहित भाजपा के जिला एवं मंडल पदाधिकारी मौजूद रहे।
वहीं, प्रदेश कार्यालय में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश सहित वरिष्ठ नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। पाकुड़ में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश उपाध्यक्ष बालमुकुंद सहाय, प्रदेश महामंत्री अमर बाउरी, जिलाध्यक्ष सरिता मुर्मू सहित बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए।






