सीआईडी जांच के बीच रिम्स के निदेशक पद से डॉ. राजकुमार का इस्तीफा, डॉ. डीके सिन्हा को मिला अतिरिक्त प्रभार

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रांची। राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में सीआईडी जांच के बीच गुरुवार को बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ। रिम्स के निदेशक डॉ. राजकुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने स्वीकार कर लिया है।

विभागीय मंत्री की मंजूरी के बाद इस्तीफा स्वीकार

स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के अनुमोदन के बाद डॉ. राजकुमार का त्यागपत्र स्वीकार कर लिया गया। इसके साथ ही रिम्स में सर्जरी विभाग के प्राध्यापक डॉ. दीपेंद्र कुमार सिन्हा को अगले आदेश तक संस्थान के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है।

डॉ. डीके सिन्हा संभालेंगे जिम्मेदारी

स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार डॉ. दीपेंद्र कुमार सिन्हा (डीके सिन्हा) तत्काल प्रभाव से रिम्स निदेशक का कार्यभार संभालेंगे। विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिया है।

सीआईडी जांच के बाद बढ़ी हलचल

उल्लेखनीय है कि 24 जून को अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) की दो अलग-अलग टीमें रिम्स पहुंची थीं। इन टीमों में चार डीएसपी स्तर के अधिकारी भी शामिल थे। जांच का केंद्र वर्ष 2025 में कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुए एमबीबीएस नामांकन और सफाई कार्य से जुड़े टेंडर में कथित अनियमितताओं के आरोप रहे।

एमबीबीएस नामांकन और टेंडर प्रक्रिया की जांच

रिम्स प्रबंधन के अनुसार, सीआईडी की पहली टीम ने एमबीबीएस पाठ्यक्रम में कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुए नामांकन मामले की जांच की। वहीं दूसरी टीम ने सफाई कार्य के लिए जारी निविदा प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और प्रक्रियाओं की पड़ताल की।

निदेशक समेत कई अधिकारियों से हुई पूछताछ

जांच के दौरान सीआईडी अधिकारियों ने तत्कालीन निदेशक डॉ. राजकुमार, डीन, चिकित्सा अधीक्षक तथा अन्य संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की। साथ ही विभिन्न मामलों से जुड़े आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी भी जुटाई गई।

टेंडर और छात्र नामांकन से जुड़े दस्तावेज जब्त

जांच पूरी होने के बाद सीआईडी की टीम टेंडर प्रक्रिया से जुड़े अभिलेखों की प्रतियां अपने साथ ले गई। इसके अलावा तीन एमबीबीएस छात्रों के खिलाफ प्राप्त शिकायतों से संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां भी जांच के लिए जब्त की गईं।

फर्जी प्रमाण पत्र मामले में पहले भी हुई कार्रवाई

रिम्स प्रशासन पहले ही फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नामांकन के एक मामले में एमबीबीएस की एक छात्रा और बीडीएस की एक छात्रा का नामांकन रद्द कर चुका है। जिला प्रशासन की जांच में दोनों छात्राओं के जाति प्रमाण पत्र अवैध और असत्य पाए गए थे।

जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें

रिम्स में चल रही सीआईडी जांच और निदेशक के इस्तीफे के बाद संस्थान में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। अब जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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