महादेव के परम भक्त रावण को उसके आराध्य बाबा बैद्यनाथ से मिलाने निकले शिवभक्त, 150 किलो की विशाल कांवड़ बनी आकर्षण का केंद्र

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भागलपुर, 21 अगस्त । सावन के पावन महीने में सुल्तानगंज से देवघर जाने वाले 105 किलोमीटर लंबे कच्चे कांवड़िया पथ पर आस्था के अनोखे रंग देखने को मिल रहे हैं। कोई भगवान शिव की प्रतिमा को कांवड़ में विराजमान कर बाबा धाम की ओर बढ़ रहा है, तो कोई अलग-अलग स्वरूपों के साथ अपनी भक्ति का प्रदर्शन कर रहा है।

कांवड़ पर विराजमान रावण की प्रतिमा बनी आकर्षण

इसी क्रम में पश्चिम बंगाल से आए शिवभक्तों का एक जत्था लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। श्रद्धालु महादेव के परम भक्त माने जाने वाले रावण की विशाल प्रतिमा को कांवड़ पर विराजमान कर पैदल देवघर के लिए निकले हैं।

इस कांवड़ की खासियत इसका भारी वजन है। रावण की प्रतिमा समेत पूरी कांवड़ का वजन 150 किलोग्राम से अधिक बताया जा रहा है। इतने भारी वजन को लेकर पथरीले और रेतीले रास्ते पर पैदल चलना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हो रहा है।

‘रावण महादेव का परम भक्त था’

पश्चिम बंगाल से आए श्रद्धालुओं ने कहा कि रावण भले ही राक्षसराज था, लेकिन वह भगवान शिव का अनन्य भक्त और प्रकांड विद्वान था। इसी आस्था के साथ वे रावण को उसके आराध्य बाबा बैद्यनाथ से मिलाने के लिए अजगैबीनाथ धाम से जल लेकर देवघर जा रहे हैं।

श्रद्धालुओं ने कहा कि कांवड़ का वजन भले ही अधिक है, लेकिन भोलेनाथ का आशीर्वाद साथ हो तो थकान और परेशानी महसूस नहीं होती। महादेव की भक्ति में उठाया गया हर कदम उन्हें बाबा धाम तक पहुंचाएगा।

‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंज रहा रास्ता

भारी वजन के बावजूद श्रद्धालु ‘बम-बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे लगाते हुए लगातार आगे बढ़ रहे हैं। कांवड़ पर सजी विशाल रावण की प्रतिमा को देखने के लिए रास्ते में लोगों की भीड़ भी जुट रही है। अनोखी कांवड़ यात्रा की तस्वीरें और वीडियो भी श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।

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