बेलडांगा हिंसा प्रकरण में 36 आरोपितों की न्यायिक हिरासत 19 फरवरी तक बढ़ी

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के अल्पसंख्यक बहुल बेलडांगा क्षेत्र में हालिया हिंसा मामले में गिरफ्तार 36 आरोपितों को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने 19 फरवरी तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। मामले की अगली सुनवाई 17 फरवरी को निर्धारित की गई है।

गुरुवार को सुनवाई के दौरान 36 में से 31 आरोपितों को वर्चुअल माध्यम से अदालत में पेश किया गया। मुर्शिदाबाद जिला पुलिस द्वारा पर्याप्त सुरक्षा एस्कॉर्ट उपलब्ध न कराए जाने के कारण एनआईए अधिकारी आरोपितों को भौतिक रूप से अदालत में पेश नहीं कर सके।

पांच आरोपित नाबालिग बताए गए हैं, जिन्हें वर्चुअल रूप से भी पेश नहीं किया गया। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने सभी 36 आरोपितों को 19 फरवरी तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार के वकील ने दलील दी कि राज्य में इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए एनआईए इस मामले में “अत्यधिक सक्रियता” दिखा रही है।

यह दूसरी बार है जब एनआईए आरोपितों को शारीरिक रूप से अदालत में पेश करने में विफल रही है। इससे पहले 5 फरवरी को भी मुर्शिदाबाद जिला पुलिस द्वारा पर्याप्त एस्कॉर्ट उपलब्ध न कराए जाने के कारण ऐसा नहीं हो सका था।

सूत्रों के अनुसार, एनआईए ने जिला पुलिस को औपचारिक अनुरोध भेजा था, लेकिन उच्च माध्यमिक परीक्षाओं में पुलिस बल की तैनाती का हवाला देते हुए एस्कॉर्ट उपलब्ध नहीं कराया गया। पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा आयोजित परीक्षाएं गुरुवार से शुरू हुई हैं।

उल्लेखनीय है कि, कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देश पर केंद्रीय गृह मंत्रालय को इस मामले में एनआईए जांच शुरू करने की अनुमति दी गई थी। इसके बाद एजेंसी ने बेलडांगा हिंसा की जांच अपने हाथ में ली।

पिछले महीने झारखंड में मुर्शिदाबाद के प्रवासी श्रमिक की हत्या की कथित फर्जी खबर फैलने के बाद इलाके में हिंसा भड़क गई थी। बाद में झारखंड पुलिस ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि संबंधित श्रमिक की मौत आत्महत्या के कारण हुई थी। पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए हत्या की खबरों को निराधार बताया था।

पश्चिम बंगाल सरकार ने उच्च न्यायालय के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी, लेकिन 11 फरवरी को उच्चतम न्यायालय के दाे जजाें की पीठ ने राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी। साथ ही एनआईए को निर्देश दिया कि वह जांच के दौरान या जांच पूरी होने के बाद अपनी स्थिति रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कलकत्ता उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे।

उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा है कि एनआईए अपनी रिपोर्ट में यह स्पष्ट करे कि एकत्रित साक्ष्यों के आधार पर गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं।

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