—कोटा प्रणाली के आधार पर जदयू उम्मीदवार ने दर्ज की जीत, अनंत सिंह के प्रचार के बावजूद अनुज सिंह को मिली हार; नीरज कुमार ने कहा—जनबल और कार्यकर्ता बल के आगे धनबल-बाहुबल नहीं चला
पटना: बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक सीट पर जदयू उम्मीदवार नीरज कुमार ने जीत दर्ज की है। मतगणना के बाद सामने आए परिणामों में राजद प्रत्याशी दिलीप कुमार दूसरे और जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार डॉ. अनुज कुमार सिंह तीसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस के डॉ. असदुल्लाह खान चौथे स्थान पर रहे। नीरज कुमार की जीत की आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।
इस चुनाव में जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह पर विशेष नजर थी। मोकामा विधायक अनंत सिंह ने पार्टी से अलग रुख अपनाते हुए अनुज सिंह के समर्थन में प्रचार किया था। हालांकि, चुनाव परिणाम में अनुज सिंह तीसरे स्थान पर रहे।
कोटा प्रणाली से नीरज कुमार की जीत
पटना स्नातक सीट पर मुकाबला कड़ा रहा। नीरज कुमार की जीत कोटा प्रणाली के तहत हुई, जिसमें कुल वैध मतों के आधे से एक अधिक मत यानी निर्धारित कोटा प्राप्त करना होता है। मतगणना के दौरान उम्मीदवारों के बीच मुकाबला चर्चा में रहा।
नीरज कुमार के आवास पर समर्थकों का जश्न
जीत की खबर के बाद नीरज कुमार के आवास पर समर्थकों और कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटने लगी। उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। इस दौरान नीरज कुमार ने चुनाव परिणाम को जनबल और कार्यकर्ताओं की ताकत से जोड़ते हुए कहा कि जनबल और कार्यकर्ता बल के आगे धनबल और बाहुबल हार गया।
अनंत सिंह पर निशाना साधते हुए उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा, “का रे गुंजन, कहां है मिठइयां।” उन्होंने आगे कहा, “कौन का मायका लाल है, हिम्मत है तो आगे बढ़ो। मेरे चरित्र पर कौन सवाल उठा रहा है? मिठाईवालों की राजनीति पर ग्रहण लग गया है।”
अनंत सिंह बोले—जनता ने जिसे वोट दिया, वही जीता
चुनाव परिणाम पर मोकामा विधायक अनंत सिंह ने कहा कि जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह हार गए हैं और मतगणना पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा, “उन्हें दुकान से लाए थे। जिसे जनता ने वोट दिया, वह जीता है और जिसे नहीं दिया, वह हारा है। इसमें मेरा क्या योगदान है? जदयू उम्मीदवार नीरज कुमार जीत गए और हम हार गए। पार्टी से मेरी कोई नाराजगी नहीं है।”
2002 में मिली थी हार, अब चौथी बार बने एमएलसी
नीरज कुमार का विधान परिषद तक पहुंचने का राजनीतिक सफर कई चुनावों से होकर गुजरा है। उन्होंने वर्ष 2002 में पहली बार एमएलसी का चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। उस समय बिहार में समता पार्टी सक्रिय थी। बताया जाता है कि सूरजभान सिंह की पहल पर नीतीश कुमार ने उन्हें टिकट दिलाया था।
वर्ष 2008 में नीरज कुमार को अनंत सिंह का समर्थन मिला और वह पहली बार बिहार विधान परिषद के सदस्य बने। इसके बाद 2014 और 2020 में भी उन्होंने जीत दर्ज की। अब 2026 के चुनाव में जीत के साथ वह चौथी बार विधान परिषद पहुंचने जा रहे हैं।
पटना स्नातक सीट का यह परिणाम इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि चुनाव प्रचार के दौरान अनंत सिंह का समर्थन जन सुराज उम्मीदवार अनुज सिंह के पक्ष में दिखाई दिया था, जबकि अंतिम परिणाम में जदयू के नीरज कुमार ने जीत दर्ज की।






