पटना। बिहार में सरकारी नौकरी और भर्ती से जुड़ी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे बी-फार्मा और बिहार पुलिस चालक सिपाही भर्ती के अभ्यर्थियों पर शुक्रवार को पुलिस ने कार्रवाई की। अभ्यर्थियों ने लोकभवन मार्च निकालने की तैयारी की थी। इसके लिए गांधी मैदान के गेट नंबर-10 के आसपास जुटने की योजना थी। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मार्च शुरू होने से पहले ही पुलिस ने गांधी मैदान और आसपास मौजूद अभ्यर्थियों को हिरासत में ले लिया और बसों में बैठाकर वहां से ले गई।
अभ्यर्थियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाना चाहते थे। वहीं, कार्रवाई के दौरान कथित दुर्व्यवहार और तिरंगे को फाड़ने के आरोप भी लगाए गए हैं। फिलहाल, इन आरोपों पर पुलिस का पक्ष सामने नहीं आया है।
मार्च से पहले गांधी मैदान के पास कार्रवाई का आरोप
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, वे अपनी मांगों को लेकर लोकभवन मार्च निकालने के लिए गांधी मैदान के गेट नंबर-10 के आसपास पहुंचे थे। उनका आरोप है कि वे सड़क किनारे खड़े थे, तभी पुलिसकर्मियों ने उन्हें वहां से हटाना शुरू कर दिया। इसके बाद बी-फार्मा और चालक सिपाही भर्ती से जुड़े कई अभ्यर्थियों को बसों में बैठाकर ले जाया गया।
बी-फार्मा अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान उनके साथ गाली-गलौज और दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रदर्शन में इस्तेमाल किए जा रहे तिरंगे को फाड़ दिया गया। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से धरना देकर अपनी मांगें उठा रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं होने के कारण उन्होंने लोकभवन मार्च निकालने का निर्णय लिया था।
बी-फार्मा अभ्यर्थियों की क्या है मांग?
बी-फार्मा अभ्यर्थियों का मुख्य मुद्दा सरकारी फार्मासिस्ट भर्ती में शैक्षणिक योग्यता और नियुक्ति के अवसरों से जुड़ा है। उनका कहना है कि चार साल की बी-फार्मा डिग्री हासिल करने के बावजूद उन्हें बिहार में फार्मासिस्ट की सरकारी भर्ती में पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं, जबकि डी-फार्मा डिप्लोमा धारकों को भर्ती प्रक्रिया में अवसर दिए जाने की बात सामने आती है।
अभ्यर्थियों की मांग है कि राज्य सरकार फार्मासिस्ट भर्ती में लागू योग्यता संबंधी नियमों को स्पष्ट करे। उनका कहना है कि केंद्र स्तर पर फार्मासिस्ट की योग्यता से जुड़े प्रावधानों में बदलाव की चर्चा के बाद बिहार में भी संबंधित नियमों और आधिकारिक निर्णय की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
अभ्यर्थियों के मुताबिक, भर्ती नियमों की स्पष्टता से बी-फार्मा डिग्रीधारियों को अपने रोजगार के अवसरों को लेकर स्थिति समझने में मदद मिलेगी। हालांकि, केंद्र सरकार के संबंधित नियमों और बिहार में उनकी लागू स्थिति की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
दो महीने से मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगने का दावा
बी-फार्मा अभ्यर्थियों का आरोप है कि वे पिछले दो महीनों से मुख्यमंत्री से मुलाकात का समय मांग रहे हैं, लेकिन उन्हें समय नहीं मिला। उनका कहना है कि उन्होंने सचिवालय में भी अपनी मांगें रखीं और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका।
अभ्यर्थियों के अनुसार, उन्होंने 6 अक्टूबर से गर्दनीबाग धरनास्थल पर धरना और भूख हड़ताल शुरू की थी। इसके बाद भी मांगों पर सुनवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने लोकभवन मार्च की योजना बनाई। अब वे फार्मासिस्ट भर्ती में योग्यता संबंधी नियमों पर स्पष्ट निर्णय और सरकार की ओर से जवाब चाहते हैं।

चालक सिपाही भर्ती में खाली पदों को लेकर विवाद
दूसरी ओर, बिहार पुलिस चालक सिपाही भर्ती के अभ्यर्थी महिला आरक्षण के तहत निर्धारित पदों में योग्य महिला अभ्यर्थियों की कमी होने की स्थिति में खाली रह जाने वाली सीटों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
इन अभ्यर्थियों की मांग है कि यदि महिला कोटे के कुछ पदों पर योग्य महिला अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं हैं, तो भर्ती नियमों के अनुसार उन रिक्त पदों पर योग्य पुरुष अभ्यर्थियों को अवसर देने पर विचार किया जाए। उनका कहना है कि वे लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षा और ड्राइविंग टेस्ट जैसी चयन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों से गुजर चुके हैं।
अभ्यर्थियों का सवाल है कि यदि महिला कोटे के पद खाली रह जाते हैं, तो उन सीटों का क्या होगा और क्या नियमानुसार दूसरे योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर मिल सकता है? वे सरकार और केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) से इस संबंध में स्पष्ट जानकारी चाहते हैं।
4,361 पदों पर भर्ती, 1,200 से 1,300 सीटें खाली रहने का दावा
बिहार पुलिस और बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस में चालक सिपाही के कुल 4,361 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन संख्या 02/2025 जारी किया गया था।

अभ्यर्थियों का दावा है कि महिला कोटे में बड़ी संख्या में सीटें खाली रह सकती हैं। उन्होंने करीब 1,200 से 1,300 पदों के रिक्त रहने की आशंका जताई है। हालांकि, यह आंकड़ा अभ्यर्थियों की ओर से किया गया दावा है। खाली पदों की वास्तविक संख्या और उन्हें भरने की प्रक्रिया के संबंध में आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
रोजगार और भर्ती नियमों पर स्पष्टता चाहते हैं अभ्यर्थी
पटना में प्रस्तावित लोकभवन मार्च से पहले हुई पुलिस कार्रवाई के बाद दोनों भर्ती आंदोलनों से जुड़े मुद्दे फिर चर्चा में आ गए हैं। बी-फार्मा अभ्यर्थी फार्मासिस्ट भर्ती में योग्यता और नियुक्ति के अवसरों पर स्पष्टता चाहते हैं, जबकि चालक सिपाही भर्ती के अभ्यर्थी महिला कोटे की संभावित रिक्तियों और उनके नियमानुसार समायोजन को लेकर जवाब मांग रहे हैं।
दोनों समूहों की प्रमुख मांग है कि सरकार और संबंधित भर्ती प्राधिकरण उनकी समस्याओं पर स्पष्ट रुख अपनाएं। फिलहाल, पुलिस कार्रवाई, अभ्यर्थियों के आरोपों और भर्ती संबंधी मांगों पर प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने का इंतजार है।






