धनबाद, 21 सितंबर। कोयलांचल में लगातार हो रही भू-धंसान, गोफ और जमीन में दरार की घटनाओं ने कतरास-बाघमारा से लेकर लोयाबाद तक लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले कुछ महीनों में अलग-अलग इलाकों में जमीन धंसने और गोफ बनने की घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों में अपने घर, परिवार और रोजगार की सुरक्षा को लेकर भय का माहौल है। लोगों का कहना है कि यह समस्या अब महज हादसों तक सीमित नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों के अस्तित्व और भविष्य से जुड़ा सवाल बन गई है।
कहीं घर जमींदोज हो रहे हैं तो कहीं सड़क, मैदान और सामुदायिक भवन प्रभावित हो रहे हैं। कई स्थानों पर गोफ बनने से जलस्रोत भी प्रभावित हुए हैं। लगातार सामने आ रही घटनाओं के बीच स्थानीय लोगों का आक्रोश अब आंदोलन का रूप लेने लगा है।
जनजागरूकता अभियान के साथ आंदोलन का बिगुल
कतरास बचाओ संघर्ष मोर्चा और छाताबाद बचाओ संघर्ष मोर्चा के बैनर तले रविवार को जनजागरूकता अभियान चलाया गया। कतरास, पचगढ़ी और छाताबाद में जुलूस निकालकर लोगों को आंदोलन से जुड़ने की अपील की गई।
प्रदर्शन के दौरान आक्रोशित लोगों ने कोयला मंत्री, बीसीसीएल (BCCL) के सीएमडी और खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) का पुतला दहन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने हिस्सा लिया।
‘हमारी जमीन, हमारा भविष्य’ के लगाए नारे
अभियान के दौरान ‘हमारी जमीन, हमारा भविष्य’, ‘सुरक्षित जीवन’, ‘स्वच्छ पर्यावरण’, ‘सुरक्षित कतरास’, ‘भू-धंसान रोको’, ‘कतरास बचाओ’ और ‘विनाश नहीं, विकास चाहिए’ जैसे नारे लगाए गए।
मोर्चा के नेताओं ने कहा कि लगातार हो रही भू-धंसान की घटनाएं इलाके के लिए गंभीर खतरे का संकेत हैं। उन्होंने लोगों से अपनी जमीन, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए एकजुट होने की अपील की।
अभियान के दौरान लोगों से कहा गया कि यदि समय रहते आवाज नहीं उठाई गई तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
इन घटनाओं से बढ़ी लोगों की चिंता
स्थानीय लोगों के मुताबिक, पिछले एक वर्ष में कतरास-बाघमारा और आसपास के इलाकों में भू-धंसान और गोफ की कई घटनाएं सामने आई हैं।
- 6 सितंबर 2025: कांटापहाड़ी पैच में सर्विस वैन खाई में गिर गई थी। हादसे में सात आउटसोर्सिंग कर्मियों की मौत हुई थी।
- 31 मार्च 2026: सोनारडीह के टंडाबाड़ी में जमींदोज की घटना में तीन लोगों की मौत हुई थी। मृतकों में पिता-पुत्री भी शामिल थे।
- 23 अप्रैल 2026: टंडाबाड़ी बस्ती में दोबारा जमींदोज की घटना हुई, जिसके बाद इलाके में दहशत फैल गई।
- 3 जून 2026: राजाकोठी में भू-धंसान की चपेट में छह घर आ गए और कई परिवार प्रभावित हुए।
- 7 जुलाई 2026: छाताबाद फुटबॉल मैदान में गोफ बनने के साथ जमीन धंस गई।
- 4 अगस्त 2026: गोविंदपुर सेलेक्टेड में भू-धंसान से छह घर प्रभावित हुए।
- 7 अगस्त 2026: छाताबाद में फिर जमींदोज की घटना हुई। करीब 12 घर प्रभावित हुए और कई लोग घायल हुए।
- 26 अगस्त 2026: छाताबाद के काजूबगान में गोफ बनने से तालाब प्रभावित हुआ।
- 8 सितंबर 2026: सिजुआ की तीन पट्टियों में जमींदोज की घटना में एक बच्चे की मौत हुई, जबकि परिवार के तीन लोग घायल हुए। कई घर भी प्रभावित हुए।
- 16 सितंबर 2026: कतरास इलाके में भू-धंसान से सामुदायिक भवन का हिस्सा प्रभावित हुआ और आसपास के दर्जनों घरों पर खतरा मंडराने लगा।
- 20 सितंबर 2026: लोयाबाद सात नंबर मुस्लिम बस्ती में बड़ी भू-धंसान की घटना हुई। चार घर इसकी चपेट में आए, जबकि दो घर पूरी तरह जमीन में समा गए।
वैज्ञानिक सर्वे और पुनर्वास की मांग
लगातार हो रही घटनाओं के बीच आंदोलन कर रहे लोगों ने बीसीसीएल और जिला प्रशासन से भू-धंसान प्रभावित क्षेत्रों का वैज्ञानिक सर्वे कराने की मांग की है। मोर्चा ने संवेदनशील इलाकों की पहचान कर वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की।
इसके अलावा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, उन्हें सुरक्षित स्थानों पर बसाने और उनकी आजीविका की व्यवस्था करने की भी मांग उठाई गई है।
‘सिर्फ राहत और निरीक्षण से नहीं निकलेगा समाधान’
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर घटना के बाद राहत कार्य या अधिकारियों के निरीक्षण से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। भू-धंसान के मूल कारणों की पहचान कर वैज्ञानिक और दीर्घकालिक समाधान की दिशा में काम करना जरूरी है।
मोर्चा के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने जरूरत पड़ने पर उग्र जनआंदोलन शुरू करने की भी चेतावनी दी है।
लगातार हो रही घटनाओं ने कतरास-बाघमारा से लेकर लोयाबाद तक यह सवाल खड़ा कर दिया है कि धंसती जमीन के बीच रह रहे लोगों की सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था कब होगी और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की दिशा में ठोस कदम कब उठाए जाएंगे।






