दरभंगा, 05 नवंबर। केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लोकतंत्र और चुनावी व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए जरूरी बताया है। उन्होंने कहा कि देश में यह प्रक्रिया पहली बार नहीं हो रही है। वर्ष 1950 से अब तक आठ बार एसआईआर हो चुका है और इस बार नौवीं बार इसे लागू किया जा रहा है।
राजग की पदयात्रा में शामिल हुए केंद्रीय मंत्री
भूपेंद्र यादव गुरुवार को दरभंगा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की ओर से आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत लहेरियासराय स्थित पोलो मैदान के धरना स्थल से हुई। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने एसआईआर का समर्थन करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों और व्यवस्था का मजबूत बने रहना जरूरी है।
एसआईआर को लोकतंत्र के लिए बताया जरूरी
भूपेंद्र यादव ने कहा कि एसआईआर देश और लोकतंत्र के हित में है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका विरोध करने वाले लोग घुसपैठियों के जरिए भारत के नागरिकों को चुनावी प्रक्रिया में पीछे करने की कोशिश कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि एसआईआर के तहत किसी का नाम मनमाने ढंग से नहीं काटा जा सकता। सभी राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) इस प्रक्रिया में शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले चुनाव में राजनीतिक दलों के करीब एक लाख 70 हजार बीएलए थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में केवल दो आपत्तियां दर्ज कराई गईं। उनके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने जांच के बाद एसआईआर की प्रक्रिया को सही पाया।

दस्तावेजों के विकल्प बढ़ाने का किया दावा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय एसआईआर में चार दस्तावेजों का विकल्प उपलब्ध था, जबकि वर्तमान सरकार ने इसे बढ़ाकर 11 कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि इनमें से कोई एक दस्तावेज प्रस्तुत कर व्यक्ति मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वा सकता है और मतदान की प्रक्रिया में भाग ले सकता है।
भूपेंद्र यादव ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए मतदाता सूची का पुनरीक्षण जरूरी है। उनके मुताबिक, एसआईआर का उद्देश्य चुनावी व्यवस्था को मजबूत करना है।






