वाशिंगटन, 17 अक्टूबर। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस और ईरान से तेल खरीद से जुड़े नए शुल्क एवं प्रतिबंधों के कुछ प्रावधानों पर छूट दी है। इससे भारत को संभावित अतिरिक्त अमेरिकी टैरिफ से फिलहाल राहत मिली है। हालांकि, यह छूट स्थायी नहीं है और भविष्य में इसे वापस लिए जाने की स्थिति में भारतीय निर्यातकों पर अतिरिक्त शुल्क का जोखिम बना रह सकता है।
नए शुल्कों के क्रियान्वयन पर फिलहाल रोक
व्हाइट हाउस के अनुसार, ट्रम्प ने 16 अक्टूबर को जारी कार्यकारी आदेश के तहत ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ के कुछ प्रावधानों पर छूट दी है। यह छूट तब तक प्रभावी रहेगी, जब तक अमेरिकी प्रशासन आगे की कार्रवाई को आवश्यक नहीं मानता।
अधिनियम में रूस से आने वाले सामानों पर 500 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क और रूसी ऊर्जा खरीद से जुड़े कुछ देशों के सामानों पर 100 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क का प्रावधान बताया गया है। प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले कुछ देशों के सामानों पर भी अतिरिक्त शुल्क लगाने की व्यवस्था शामिल है।
हालांकि, आदेश में दी गई छूट के कारण ये शुल्क फिलहाल स्वतः लागू नहीं होंगे। इसका अर्थ यह भी है कि आदेश के तहत भारतीय वस्तुओं पर नया 100 प्रतिशत शुल्क अपने आप नहीं लगाया गया है।
तीन श्रेणियों के शुल्क छूट के दायरे में
वक्तव्य के मुताबिक, छूट के दायरे में तीन प्रमुख श्रेणियों के शुल्क शामिल हैं। इनमें रूस से आने वाले सामानों पर प्रस्तावित 500 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क, रूसी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के शीर्ष पांच आयातक देशों से आने वाले सामानों पर कुछ शर्तों के तहत 100 प्रतिशत शुल्क और रूसी तेल प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले प्रमुख देशों के सामानों पर अतिरिक्त शुल्क शामिल हैं।
रूसी ऊर्जा के शीर्ष पांच आयातक देशों से संबंधित प्रावधान में 18 अक्टूबर 2026 या उसके बाद नई खरीदारी की शर्त का भी उल्लेख है। हालांकि, वक्तव्य में संबंधित देशों के नाम स्पष्ट नहीं किए गए हैं।
आदेश के अनुसार, इसकी धारा 4(ए) इन शुल्कों पर छूट का प्रावधान करती है। राष्ट्रपति ने इस संबंध में आवश्यक राष्ट्रीय हित प्रमाणन और रिपोर्ट कांग्रेस को सौंपने की पुष्टि भी की है।
भारत को निर्यात के मोर्चे पर राहत
भारत रूस से कच्चे तेल के प्रमुख खरीदारों में शामिल है। ऐसे में रूसी ऊर्जा की खरीद से संबंधित अमेरिकी प्रतिबंधों का असर भारत के ऊर्जा व्यापार और अमेरिका को होने वाले निर्यात पर पड़ सकता है।
फिलहाल मिली छूट से भारतीय निर्यातकों को इस कानून के तहत संभावित अतिरिक्त शुल्क से राहत मिली है। हालांकि, यह भारत के लिए घोषित कोई विशेष छूट नहीं है। आदेश में किसी एक देश को अलग से राहत देने की बात नहीं कही गई है।
विश्लेषकों के अनुसार, इस कदम को मौजूदा अमेरिकी शुल्क में कटौती के बजाय संभावित नए व्यापारिक बोझ से अस्थायी बचाव के रूप में देखा जाना चाहिए।
रूस से कारोबार पर सभी प्रतिबंध खत्म नहीं
छूट के बावजूद रूस से जुड़े सभी कारोबार पर प्रतिबंध समाप्त नहीं हुए हैं। आदेश की धारा 4(बी) पहले के रूस-विरोधी कार्यकारी आदेशों के तहत लगाए गए प्रतिबंधों को बरकरार रखती है।
इसका मतलब है कि नए अतिरिक्त टैरिफ से राहत मिलने के बावजूद रूस के कुछ आपूर्तिकर्ताओं, बैंकों या मध्यस्थों के साथ लेन-देन पर प्रतिबंधों का जोखिम बना रह सकता है। इसलिए देश-स्तर पर लगाए जाने वाले अतिरिक्त शुल्क और किसी खास कारोबारी लेन-देन पर लागू प्रतिबंधों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
भविष्य में बदल सकती है अमेरिकी नीति
वक्तव्य के मुताबिक, छूट की कोई निश्चित अंतिम तारीख निर्धारित नहीं की गई है। इसे आगे जारी रखने या इसमें बदलाव करने का फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति या विदेश मंत्री उचित परामर्श के बाद कर सकते हैं।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) को रूसी ऊर्जा की खरीद और प्रतिबंधों के अनुपालन की निगरानी करने, राष्ट्रपति को रिपोर्ट देने तथा छूट में बदलाव की सिफारिश करने का अधिकार भी दिया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भविष्य में छूट वापस ली जाती है और भारत पर निर्धारित मानदंड लागू होते हैं, तो भारतीय मूल के सामानों पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने का जोखिम पैदा हो सकता है। इसलिए मौजूदा राहत के बावजूद भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में अनिश्चितता बनी हुई है।






