झारखंड हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: सीओ से पूछा; कब्जा हटाने की बजाय निर्माण क्यों तोड़ा?

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रांची, 10 अप्रैल । झारखंड उच्च न्यायालय ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए सर्किल ऑफिसर (सीओ), हेहल से पूछा है कि जमीन से कब्जा हटाने की बजाय निर्माण (स्ट्रक्चर) ध्वस्त क्यों किया गया।

कोर्ट ने जताई नाराजगी

महादेव उरांव की अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान सीओ की ओर से दाखिल शो-कॉज में बताया गया कि हस्तक्षेपकर्ताओं को तीन बार नोटिस दिया गया था, लेकिन उन्होंने जरूरी दस्तावेज नहीं दिए। इसके बाद निर्माण तोड़ने की कार्रवाई शुरू की गई। इस पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई।

प्रार्थी से भी मांगा जवाब

कोर्ट ने प्रार्थी से सवाल किया कि रिट याचिका दाखिल करते समय हस्तक्षेपकर्ताओं से एग्रीमेंट और उनसे पैसा लेने की बात क्यों छिपाई गई। इस मुद्दे पर भी अदालत ने जवाब तलब किया है।

अंतरिम राहत बरकरार

अदालत ने हस्तक्षेपकर्ताओं को पहले दी गई अंतरिम राहत—यानी उनके खिलाफ किसी भी पीड़क कार्रवाई पर रोक—अगले आदेश तक जारी रखने का निर्देश दिया है।

हस्तक्षेप याचिका स्वीकार

न्यायमूर्ति Rajesh Shankar की अदालत ने हस्तक्षेप याचिका स्वीकार करते हुए प्रभावित पक्षों को मामले में प्रतिवादी बनाया है। साथ ही सीओ के शो-कॉज पर जवाब देने को कहा गया है। अगली सुनवाई 8 मई को होगी।

बुलडोजर कार्रवाई पर विवाद

यह मामला सुखदेवनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने से जुड़ा है, जहां जिला प्रशासन ने खादगड़ा शिव दुर्गा मंदिर रोड स्थित जमीन पर बने 12 घरों को तोड़ने का आदेश दिया था। बुलडोजर कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों ने विरोध जताया।

लाखों रुपये देकर खरीदी जमीन: स्थानीय लोग

स्थानीय निवासियों का दावा है कि उन्होंने प्रति कट्ठा 5.25 लाख रुपये के हिसाब से जमीन खरीदी और वर्षों से वहां रह रहे हैं। उनके अनुसार, करीब 38.25 डिसमिल जमीन के लिए उन्होंने 1 करोड़ से अधिक राशि का भुगतान किया, बावजूद इसके अब उन्हें बेदखल किया जा रहा है।

अगली सुनवाई पर टिकी नजर

मामले में अब सभी पक्षों की नजर अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां अदालत आगे की कार्रवाई और जिम्मेदारी तय कर सकती है।

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