झारखंड में निवेश पर सियासत तेज, BJP ने सरकार पर लगाए ‘री-पैकेजिंग’ का आरोप

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रांची, 13 जुलाई — झारखंड में निवेश को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने हेमंत सरकार पर तीखा हमला बोला है। भाजपा प्रदेश के मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार पुराने निवेश प्रस्तावों को नए रूप में पेश कर जनता को गुमराह कर रही है।

“99,639 करोड़ के निवेश में नया कुछ नहीं”

सोमवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रतुल शाह देव ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा हाल ही में घोषित 99,639 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव वास्तव में नए नहीं हैं। ये दावोस और यूके यात्रा के बाद करीब छह महीने पहले घोषित निवेश प्रस्तावों की ही री-पैकेजिंग हैं।

उन्होंने कहा कि फरवरी 2026 में सरकार ने 1.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों की घोषणा की थी और अब उन्हीं कंपनियों के प्रस्तावों को दोबारा नए निवेश के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

इन कंपनियों के नाम दोबारा सामने आए

प्रतुल शाह देव ने कहा कि हाल की घोषणाओं में जिन प्रमुख कंपनियों का उल्लेख किया गया, उनमें—

  • जिंदल स्टील लिमिटेड (40,000 करोड़)
  • जिंदल न्यूक्लियर पावर (30,000 करोड़)
  • रुंगटा संस (10,000 करोड़)
  • रुंगटा माइंस (3,000 करोड़)
  • टाटा स्टील हिसारना (7,000 करोड़)
  • अमलगम स्टील एंड पावर (4,980 करोड़)
  • टाटा स्टील टिन प्लेट विस्तार (2,600 करोड़)
  • अंबुजा सीमेंट (1,000 करोड़)
  • जिंदल रिन्यूएबल्स (650 करोड़)

उन्होंने दावा किया कि यही कंपनियां और लगभग यही निवेश राशि पहले भी घोषित की जा चुकी है, जिन्हें अब फिर से 99,639 करोड़ रुपये के पैकेज में शामिल किया गया है।

सरकार से जवाब मांग

भाजपा प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि यदि ये निवेश वास्तव में नए हैं, तो पहले हुए एमओयू का क्या हुआ? उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि पिछले छह महीनों में—

  • कितनी परियोजनाओं पर वास्तविक निवेश हुआ,
  • कितनी भूमि आवंटित की गई,
  • कितने उद्योगों का निर्माण शुरू हुआ,
  • और कितने स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला।

न्यूक्लियर प्रोजेक्ट पर भी सवाल

प्रतुल शाह देव ने 30,000 करोड़ रुपये के जिंदल न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट पर विशेष सवाल उठाते हुए कहा कि परमाणु ऊर्जा केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। ऐसे में केवल राज्य सरकार और निजी कंपनी के बीच एमओयू से इस तरह की परियोजना संभव नहीं है।

उन्होंने पूछा कि क्या इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार, परमाणु ऊर्जा विभाग और अन्य नियामक संस्थाओं से आवश्यक अनुमति ली गई है? यदि नहीं, तो इस निवेश का प्रचार केवल “कागजी घोषणा” है।

“निवेश का स्वागत, लेकिन पारदर्शिता जरूरी”

अंत में उन्होंने कहा कि भाजपा राज्य के हित में होने वाले सभी औद्योगिक निवेशों का स्वागत करती है, लेकिन सरकार को हवा-हवाई घोषणाओं से बचना चाहिए और पारदर्शिता के साथ काम करना चाहिए।

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