झारखंड के सभी मेडिकल कॉलेजों में खुलेंगे कैंसर डे-केयर सेंटर, छह जगहों पर विकसित होंगे रेडिएशन सेंटर

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रांची, 12 सितंबर। झारखंड में कैंसर मरीजों के इलाज की सुविधा को मजबूत करने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों के साथ रांची सदर अस्पताल में कैंसर डे-केयर सेंटर विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा राज्य में छह स्थानों पर रेडिएशन सेंटर स्थापित करने की योजना है। इन दोनों सुविधाओं को पीपीपी मॉडल पर संचालित करने का प्रस्ताव है।

छह मेडिकल कॉलेजों में रेडिएशन सेंटर का प्रस्ताव

प्रस्तावित योजना के तहत रांची सदर अस्पताल के अलावा धनबाद, जमशेदपुर, पलामू, हजारीबाग और दुमका स्थित मेडिकल कॉलेजों में कैंसर उपचार से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

इसी क्रम में छह स्थानों पर आधुनिक रेडिएशन सेंटर स्थापित करने की तैयारी है। इसके लिए आवश्यक मशीन, मानवबल, संसाधन और संचालन लागत का आकलन कर विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।

अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक

इस योजना को लेकर शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में राज्य में कैंसर उपचार की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा की गई।

अपर मुख्य सचिव ने जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध संसाधनों, मशीनों, मानवबल और आवश्यक खर्च का आकलन कर प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया। साथ ही जिला स्तर पर कैंसर मरीजों को कीमोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई।

आधुनिक लीनैक मशीन की होगी जरूरत

बैठक में रेडिएशन उपचार के लिए आधुनिक लीनैक मशीन की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि रेडिएशन सेंटर के संचालन के लिए केवल मशीन की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है। इसके लिए रेडिएशन विशेषज्ञ, तकनीशियन और रेडियो फिजिसिस्ट जैसे प्रशिक्षित मानवबल की भी आवश्यकता होगी।

राज्य में रेडियो फिजिसिस्ट की कमी को इस योजना के सामने प्रमुख चुनौती माना गया है। मशीन खराब होने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था और उसके नियमित रखरखाव की व्यवस्था पर भी बैठक में चर्चा हुई।

डे-केयर और रेडिएशन सेंटर होंगे अलग-अलग

बैठक में तय किया गया कि कैंसर डे-केयर सेंटर और रेडिएशन सेंटर की व्यवस्था अलग-अलग होगी। डे-केयर सेंटर का संचालन प्रशिक्षित चिकित्सा पदाधिकारी के माध्यम से किया जाएगा, जबकि रेडिएशन सेंटर के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित तकनीकी मानवबल की व्यवस्था की जाएगी।

इस संबंध में बिहार में संचालित डे-केयर मॉडल का भी बैठक में संदर्भ लिया गया। वहां चिकित्सा पदाधिकारियों को प्रशिक्षण देकर डे-केयर सेवा संचालित की जा रही है।

आयुष्मान और अबुआ स्वास्थ्य योजना के लाभार्थियों को पैकेज के अनुसार इलाज

प्रस्तावित कैंसर डे-केयर और रेडिएशन सेंटरों में आयुष्मान भारत तथा अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के कार्डधारियों को संबंधित योजना के निर्धारित पैकेज और दर के अनुसार उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।

अन्य मरीजों के लिए सीजीएचएस की निर्धारित दरों को उपचार की दर का आधार बनाने पर सहमति बनी है।

निगरानी के लिए बनेगी विभागीय समिति

पूरी योजना की निगरानी के लिए स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर एक समिति गठित की जाएगी। अपर सचिव सह झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक शशि प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में गठित होने वाली समिति प्रस्ताव तैयार करने, संसाधनों के आकलन, टेंडर प्रक्रिया और सेंटरों के संचालन की व्यवस्था की निगरानी करेगी।

विभाग की ओर से भारत सरकार के बीजीएफ कार्यक्रम के तहत भी प्रस्ताव भेजकर आवश्यक स्वीकृति प्राप्त करने की तैयारी की जा रही है।

दो समूहों में बांटने पर विचार

प्रस्तावित रेडिएशन सेंटरों के लिए मेडिकल कॉलेजों को दो समूहों में रखने पर भी विचार किया गया है। पहले समूह में जमशेदपुर, धनबाद और दुमका, जबकि दूसरे समूह में रांची, हजारीबाग और पलामू को शामिल करने का प्रस्ताव है।

रिम्स में बन सकता है कंट्रोल एवं कमांड सेंटर

कैंसर डे-केयर सेंटरों की केंद्रीकृत निगरानी के लिए रिम्स, रांची में कंट्रोल एवं कमांड सेंटर विकसित करने की संभावना पर भी चर्चा हुई। इसके जरिए विभिन्न डे-केयर सेंटरों की गतिविधियों और सेवाओं की निगरानी की जा सकती है।

इसके अलावा रांची, जमशेदपुर और धनबाद में पैट स्कैन की सुविधा के विस्तार और इसे पीपीपी मोड पर संचालित करने की संभावनाओं की भी समीक्षा की गई।

बैठक में स्वास्थ्य विभाग की विशेष सचिव डॉ. नेहा अरोड़ा, झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक शशि प्रकाश सिंह, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. विमलेश कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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