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कैबिनेट का बड़ा फैसला: एनआईआईएफ में 30 हजार करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश को मंजूरी, कुल प्रतिबद्धता 60 हजार करोड़ पहुंची

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश में बुनियादी ढांचा विकास को गति देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) के लिए 30 हजार करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए इस फैसले के बाद एनआईआईएफ में केंद्र सरकार की कुल निवेश प्रतिबद्धता बढ़कर 60 हजार करोड़ रुपये हो गई है।

वित्त मंत्रालय ने सोमवार को जारी बयान में बताया कि अतिरिक्त निवेश एनआईआईएफ के नए और आगामी फंडों के लिए किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे आधारभूत संरचना और राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं में निवेश को और मजबूती मिलेगी तथा देश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को नई गति मिलेगी।

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क्या है एनआईआईएफ?

राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) भारत का सॉवरेन एंकर फंड है, जिसका संचालन नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड लिमिटेड (NIIFL) पेशेवर तरीके से करता है। इसमें भारत सरकार की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वर्तमान में एनआईआईएफ करीब 40 हजार करोड़ रुपये की पूंजी प्रतिबद्धता का प्रबंधन कर रहा है।

बेहतर निवेश प्रदर्शन

वित्त मंत्रालय के अनुसार, एनआईआईएफ ने निवेश और रिटर्न के मामले में मजबूत प्रदर्शन किया है। फंड ने अपने विभिन्न पोर्टफोलियो से सफल निकासी के जरिए निवेशकों को लगभग 12 हजार करोड़ रुपये वापस भी किए हैं, जिससे इसकी निवेश क्षमता और विश्वसनीयता मजबूत हुई है।

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वैश्विक निवेशकों का भरोसा

एनआईआईएफ में दुनिया के कई प्रमुख संस्थागत निवेशकों ने निवेश किया है। इनमें अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी, ऑस्ट्रेलियनसुपर, सीपीपी इन्वेस्टमेंट्स, ओंटारियो टीचर्स पेंशन प्लान, पीएसपी इन्वेस्टमेंट्स, टेमासेक, एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB), न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB), एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB), जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (JBIC), यूएस इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन (DFC), एक्सिस बैंक, एचडीएफसी ग्रुप, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा लाइफ इंश्योरेंस और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) जैसे बड़े वित्तीय संस्थान शामिल हैं।

इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश को मिलेगा नया बल

सरकार का मानना है कि अतिरिक्त 30 हजार करोड़ रुपये की यह प्रतिबद्धता सड़कों, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, शहरी अवसंरचना और अन्य राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं में निवेश को गति देगी। साथ ही इससे घरेलू और विदेशी निवेशकों का भरोसा भी और मजबूत होगा तथा भारत के दीर्घकालिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को नई दिशा मिलेगी।

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