पूर्वी सिंहभूम। कोल्हान के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य संस्थान एमजीएम अस्पताल एक बार फिर गंभीर लापरवाही, अमानवीय व्यवहार और कथित घूसखोरी के आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। कदमा थाना क्षेत्र अंतर्गत कपाली निवासी राजा खान हाल ही में एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। दुर्घटना में उनका बायां पैर तीन जगहों से टूट गया, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण इलाज की व्यवस्था कर पाना उनके लिए मुश्किल था। परिजनों की सूचना पर सामाजिक कार्यकर्ता विकास कुमार अस्पताल पहुंचे और ऑपरेशन में लगने वाली स्टील रॉड सहित अन्य आवश्यक सामग्री का भुगतान कर इलाज की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का प्रयास किया। इसके बावजूद आरोप है कि अस्पताल प्रशासन और स्टाफ की लापरवाही के चलते मरीज को समय पर ऑपरेशन नहीं किया गया।
शनिवार को परिजनों ने आरोप लगाया है कि ऑपरेशन के लिए तैयार मरीज को करीब पांच से छह घंटे तक व्हीलचेयर पर ऑपरेशन थिएटर के बाहर बैठाए रखा गया और बार-बार ऑपरेशन टाल दिया गया। इस दौरान मरीज की हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन न तो उचित इलाज किया गया और न ही परिजनों को स्पष्ट जानकारी दी गई।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि ऑपरेशन के लिए 35 हजार रुपये की अवैध मांग की जा रही थी। परिजनों का कहना है कि रुपये नहीं देने पर ऑपरेशन की तारीख तय नहीं की गई। विरोध करने पर अस्पताल के कुछ कर्मचारियों, नर्सों और स्टाफ द्वारा मरीज, परिजनों और मौके पर पहुंचे पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार और धमकी देने का भी आरोप है।
मामले के तूल पकड़ने के बाद अस्पताल अधीक्षक डॉ. नकुल प्रसाद चौधरी ने ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर से फोन पर बात कर शीघ्र ऑपरेशन कराने का निर्देश दिया। उन्होंने फंड की कमी की बात स्वीकार की, लेकिन अवैध वसूली के आरोपों पर कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं हो सकी।
यह मामला सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों के साथ हो रहे कथित शोषण और भ्रष्टाचार की गंभीर तस्वीर पेश करता है। सवाल यह है कि मुफ्त इलाज के दावों के बीच ऐसे मामलों पर जिम्मेदारों के खिलाफ कब सख्त कदम उठाए जाएंगे।





