अमेरिकी प्रतिबंधों के खतरे के बीच रूस बना भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर, अगस्त में कुल आयात में 45% हिस्सेदारी

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मॉस्को/नई दिल्ली, 04 सितंबर। अमेरिकी प्रतिबंधों के बढ़ते खतरे और भारत के कुल कच्चे तेल आयात में गिरावट के बावजूद रूस अगस्त में भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना रहा। मैरीटाइम इंटेलिजेंस फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में रूस ने भारत को प्रतिदिन करीब 21 लाख बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति की, जो देश के कुल तेल आयात का लगभग 45 प्रतिशत रहा।

जुलाई के रिकॉर्ड स्तर से नीचे आई रूसी सप्लाई

हालांकि, अगस्त में रूस से भारत की तेल खरीद जुलाई के रिकॉर्ड स्तर की तुलना में कम रही। जुलाई में रूस ने भारत को करीब 28 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल की आपूर्ति की थी, जो भारत की कुल क्रूड खरीद के आधे से अधिक के बराबर थी।

रूस के अंतरराष्ट्रीय समाचार टेलीविजन नेटवर्क रशिया टुडे (आरटी) ने केप्लर के आंकड़ों के हवाले से बताया कि अगस्त में भारत का कुल कच्चा तेल आयात घटकर करीब 46 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। जुलाई में यह आंकड़ा लगभग 50 लाख बैरल प्रतिदिन था। इस तरह एक महीने में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में करीब आठ प्रतिशत की गिरावट आई।

रिफाइनरियों की सामान्य खरीद और मेंटेनेंस का असर

विश्लेषकों के मुताबिक, अगस्त में रूसी तेल की खरीद में कमी को केवल भारत की मांग में गिरावट के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। मई, जून और जुलाई में मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच संभावित आपूर्ति संकट से बचने के लिए भारतीय रिफाइनरियों ने बड़े पैमाने पर कच्चे तेल की खरीद की थी।

इसके बाद अगस्त में कुछ रिफाइनरियां अपनी सामान्य खरीद के स्तर पर लौट आईं। इसके अलावा कई रिफाइनरियों में निर्धारित मेंटेनेंस और रूसी क्रूड की सीमित उपलब्धता ने भी आयात को प्रभावित किया।

रूसी तेल के उपलब्ध कार्गो में कमी

अबू धाबी की कमोडिटी विश्लेषक नतालिया काटोना के मुताबिक, अगस्त में भारत ने अपनी इच्छा से रूसी तेल की खरीद में बड़ी कटौती नहीं की, बल्कि रूस के पास निर्यात के लिए उपलब्ध बैरल की संख्या कम थी। समुद्री रास्ते से रूसी तेल के कम निर्यात और उपलब्ध कार्गो के लिए चीनी रिफाइनरियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा का भी असर पड़ा।

यूएई, सऊदी अरब और वेनेजुएला भी प्रमुख सप्लायर

अगस्त में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब और वेनेजुएला भारत के अन्य प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता रहे। खास तौर पर वेनेजुएला से भारत की तेल खरीद में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में वेनेजुएला से होने वाली तेल आपूर्ति 2020 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई।

ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूसी तेल महत्वपूर्ण

रूसी तेल भारत के ऊर्जा मिश्रण का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। मध्य पूर्व में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाली तेल आपूर्ति को लेकर संभावित जोखिमों के बीच भारत अपने लिए पर्याप्त और सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है।

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का करीब 90 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में कीमत, उपलब्धता और आपूर्ति की स्थिरता उसकी तेल खरीद नीति के प्रमुख आधार हैं। रूसी तेल के बड़े खरीदारों पर अमेरिकी कार्रवाई की आशंका के बावजूद भारत ने रूसी क्रूड की खरीद जारी रखी है।

रूसी तेल खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा

अमेरिकी सीनेट ने पिछले महीने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ को मंजूरी दी थी। प्रस्तावित कानून के तहत रूसी तेल के प्रमुख खरीदारों से होने वाले आयात पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। इस विधेयक को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन प्राप्त है, हालांकि इसे अभी अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से मंजूरी मिलना बाकी है।

कीमत और ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता

भारत लगातार कहता रहा है कि उसकी तेल खरीद भू-राजनीतिक प्राथमिकताओं के बजाय कीमत, उपलब्धता और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा जैसे व्यावहारिक कारकों पर आधारित है। अगस्त के आंकड़े भी संकेत देते हैं कि रूसी तेल की आपूर्ति में कमी के बावजूद रूस भारत के ऊर्जा बाजार में सबसे महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

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